होलिका दहन के मुहूर्त को लेकर शहर में एक बार फिर असमंजस की स्थिति बन गई है। विभिन्न ज्योतिष विद्वानों की बैठकें हुईं, लेकिन एक मत पर सहमति नहीं बन पाई। ग्रहण और सूतक काल को लेकर अलग-अलग मत सामने आने से श्रद्धालुओं में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
तीन दिन पूर्व युवा पंडितों की एक बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें पंचांगों के आधार पर मंगलवार प्रात: 5:20 बजे होलिका दहन का समय तय किया गया। इस निर्णय को शहर की प्रमुख बड़ी होली किला गेट समिति ने भी स्वीकार किया और उसी समय दहन करने की घोषणा की। बड़ी होली प्रबंधक मंडल की ओर से भी मंगलवार सुबह 5:20 बजे का समय सार्वजनिक किया गया।
वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य उपेन्द्र नाथ चतुर्वेदी ने पंचांग गणना के आधार पर सोमवार रात्रि आठ बजे को अधिक उपयुक्त मुहूर्त बताया है। उनका कहना है कि मंगलवार सुबह 6:20 बजे से सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा, उसी दिन ग्रहण लग रहा है। ऐसे में सूतक से पूर्व ही दहन किया जाना शास्त्र सम्मत रहेगा।
सूतक काल पर मतभेद की स्थिति बनी है। एक पक्ष का तर्क है कि 5:20 बजे दहन करने से सूतक से पूर्व अनुष्ठान पूर्ण हो जाएगा, जबकि दूसरा पक्ष मानता है कि रात्रि में ही दहन करना अधिक सुरक्षित और शास्त्रोक्त होगा। कई श्रद्धालु बड़ी होली किला गेट के पारंपरिक निर्णय का पालन करने की बात कह रहे हैं, तो कुछ लोग अपने पारिवारिक पंडितों के अनुसार सोमवार रात को ही दहन की तैयारी में हैं।
- दो मार्च सोमवार को शाम आठ बजे प्रदोषकाल में होली का दहन होगा। तीन मार्च सुबह का समय शास्त्र के विरुद्ध है, व्यावहारिक तौर पर भी यह मुमकिन नहीं है, क्योंकि मंगलवार सुबह 06.20 बजे से सूतक लगने है तो एक घंटे में कैसे घरों पर पूजन आदि होगा। - आचार्य उपेन्द्र नाथ चतुर्वेदी, विद्वान।
सत्यनारायण, व्रत कथा, हननुमान पूजन, जाहरवीर पूजन, माता-बहनों द्वारा होलिका पूजन, 02 मार्च को, होलिका का दहन 03 मार्च मंगलवार सुबह 05:19 बजे होगा, चद्र ग्रहण 03 मार्च दोपहर 03:बजे से 06:47 बजे तक, रंग गुलाल खेलने वाली होली 04 मार्च को मनाई जाएगी।- आचार्य सीपूजी महाराज, विद्वान
आचार्य उपेन्द्र नाथ चतुर्वेदी, विद्वान।