अपने पति भारत केसरी सतलज पहलवान के साथ साक्षी मलिक।
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पिछले साल रियो ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक देश में कुश्ती की उपेक्षा से नाखुश हैं। उनका कहना है कि सरकार क्रिकेट को तो तवज्जो दे रही है लेकिन कुश्ती के खेल को लेकर वह ज्यादा गंभीर नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि पहले की तुलना में कुश्ती की तरफ सरकारों ने अब ध्यान देना शुरू किया है। लड़कियों का भी कुश्ती की ओर रुझान बढ़ रहा है।
साक्षी रविवार को यहां बृज क्षेत्र के लक्खी मेला श्रीदाऊजी महाराज में अपने पति के साथ आईं थीं। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कुश्ती की महिला कोच के सवाल पर कहा कि वर्तमान में उनकी कोच वर्ष 2010 के कॉमनवेल्थ में खेल चुकीं महिला ही हैं। वह भी यूपी की रहने वाली हैं। खेल रत्न अवार्ड और पद्मश्री से सम्मानित साक्षी ने कहा कि वह इस गेम में आने वाली लड़कियों की वह पूरी मदद करती हैं। शहरों में जरूर खेलकूद के लिए स्टेडियम बने हुए हैं, लेकिन गांवों में आज भी खेलों और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए कोई सुविधा नहीं है। सरकार गांवों की तरफ ध्यान दे तो निश्चित रूप से वहां छिपी तमाम प्रतिभाएं उजागर होंगी, जो देश का नाम रोशन करेंगी।
उन्होंने कहा कि वह वर्तमान में वह कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी कर रही हैं। उसके बाद जो समय मिलता हैं, उसमें वह लड़कियों को इस खेल में अधिक से अधिक आने के लिए प्रेरित करती हैं। साक्षी ने कहा कि सरकार क्रिकेट की तरह से इस खेल को ज्यादा तवज्जो नहीं दे रही है। जितना पैसा और सुविधाएं क्रिकेट खिलाड़ियों को मिल रहा है, उतना कुश्ती में पहलवानों को नहीं मिल रहा। साक्षी ने कहा कि वह मेला श्रीदाऊजी महाराज के दंगल में दूसरी बार आई हैं। पिछली बार भी आयोजकों ने उन्हें बुलाया था। वह और उनका परिवार दाऊजी मेले के दंगल में आकर बेहद खुश हैं। इस मौके पर पूर्व विधायक राजवीर सिंह पहलवान, दंगल संयोजक देवेंद्र शर्मा और अन्य लोग भी मौजूद थे।