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ग्रामीण बच्चों का अंग्रेजी शिक्षा का सपना अधूरा

Thu, 04 Jan 2018 12:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस। 
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स्कूल - फोटो : Amar Ujala
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ग्रामीण क्षेत्र के गरीब विद्यार्थियों को अंग्रेजी माध्यम की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने के लिए जिले में बनाए गए चार मॉडल स्कूलों के भवन पिछले तीन शिक्षा सत्रों से धूल फांक रहे है। प्रदेश सरकार इनका संचालन ही शुरू नहीं कर पा रही है। उम्मीद की जा रही है कि शिक्षा सत्र 2017-18 में 12.08 करोड़ रुपये की लागत से बने इन विद्यालयों का संचालन शुरू हो जाएगा, जिससे ग्रामीण और गरीब विद्यार्थियों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सपना पूरा हो सकेगा।
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प्रदेश में अभिभावकों का लगातार हिंदी मीडियम के विद्यालयों से मोह भंग हो रहा है जबकि अभिभावकों का रुझान लगातार सीबीएसई के अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों की ओर बढ़ता जा रहा है। अभिभावकों के इस मोह को भुनाने के लिए प्राइवेट स्कूल संचालक भी सीबीएसई के मान्यता प्राप्त स्कूलों का संचालन कर रहे हैं, जिससे इन लोगों के लिए यह स्कूल मोटी कमाई का जरिया भी बन गए हैं। अभिभावक मोटी फीस चुकाने के बावजूद अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित मानकर इन स्कूलों में ही अपने बच्चों को पढ़ाना पसंद कर रहे हैं।

सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र के गरीब अभिभावकों का यह ख्वाब पूरा करने के लिए ही शिक्षा सत्र 2014-15 में जिले के शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े पांच ब्लॉकों के ग्रामीण एवं गरीब बच्चों को अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा दिलाने के लिए पांच मॉडल स्कूलों के निर्माण को स्वीकृति प्रदान की थी। इसमें से माध्यमिक शिक्षा विभाग को ब्लॉक हसायन में इस स्कूल का भवन का निर्माण कराए जाने के लिए मानक के अनुरूप भूमि ही नहीं मिल पाई, जबकि टुकसान, सीस्ता, बाजीदपुर और गुतहरा में मॉडल स्कूलों का निर्माण तो करा दिया गया, लेकिन इनका संचालन आज तक नहीं हो सका है। उम्मीद की जा रही है कि इस सत्र में सरकार द्वारा इन स्कूलों का संचालन कर ग्रामीण एवं गरीब विद्यार्थियों को अंग्रेजी माध्यम की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने का सपना साकार हो सकेगा। इसके साथ ही इन गरीब विद्यार्थियों के अभिभावकों को अच्छी पढ़ाई के लिए अधिक कीमत भी नहीं चुकानी पड़ेगी।
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