इंडियन बैंक की मुख्य शाखा में सामने आए 4.38 करोड़ रुपये के एमएसएमई ऋण घोटाले ने बैंक की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब पांच साल तक अलग-अलग खातों के माध्यम से ऋण स्वीकृत और वितरित होते रहे, लेकिन बैंक की जांच में कई ऋण आवेदनों में लगाए गए दस्तावेज और परियोजनाएं फर्जी मिलीं। अब पुलिस की विवेचना में बैंक कर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
गौरतलब है कि बैंक के अंचल प्रबंधक की शिकायत पर कोतवाली सदर में 171 ऋणधारकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। मामले में चार मध्यस्थों और 14 वेंडरों को भी आरोपी बनाया गया है। बैंक की आंतरिक जांच में सामने आया कि 16 अक्तूबर 2017 से 27 जून 2022 के बीच विभिन्न एमएसएमई ऋण खातों के माध्यम से बैंक को कुल 4,38,36,857.13 रुपये की वित्तीय क्षति पहुंचाई गई।
जांच में ऋण आवेदनों में दिखाई गई परियोजनाओं के आधार पर जमीन पर कोई वास्तविक औद्योगिक गतिविधि नहीं मिली। कई मामलों में संपत्ति के दस्तावेजों की जांच में कमी सामने आई। वहीं ऋण स्वीकृत कराने के लिए लगाए गए बिल, कोटेशन, वाउचर और अन्य कागजात भी संदिग्ध अथवा कूटरचित पाए गए। मशीनरी और उपकरणों की आपूर्ति के नाम पर भी कागजों में ही प्रक्रिया पूरी करने के आरोप हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने लंबे समय तक ऋण प्रकरणों की जांच, दस्तावेजों के सत्यापन और ऋण राशि के इस्तेमाल की निगरानी किस स्तर पर हुई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटेगी कि फर्जी दस्तावेजों के बावजूद ऋण कैसे स्वीकृत हुए और इसमें बैंक के किसी कर्मचारी या अधिकारी की मिलीभगत थी या नहीं। हालांकि अभी बैंक कर्मियों की भूमिका को लेकर पुलिस जांच पूरी नहीं हुई है।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
इंडियन बैंक की इसी शाखा में वर्ष 2013 में भी फर्जीवाड़े का खुलासा हो चुका है। जिला समाज कल्याण अधिकारी के नाम से फर्जी नोशनल खाता खोले जाने की घटना ने उस समय भी बैंक की दस्तावेज सत्यापन व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। समाज कल्याण अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर से चेक लगाने के प्रयास के दौरान इसका खुलासा हुआ था। अब एमएसएमई ऋण घोटाले में बैंक चर्चा में है।
अब जांच के अहम बिंदु
-ऋण आवेदनों की जांच किस बैंक अधिकारी ने की?
-फर्जी परियोजनाओं और संपत्तियों का सत्यापन कैसे हुआ?
-मशीनरी खरीद के बिल और वेंडरों की जांच किस स्तर पर हुई?
-ऋण राशि जारी करने से पहले बैंक की आंतरिक प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं?
-171 ऋण खातों में समान पैटर्न होने के बावजूद समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
पुलिस अधीक्षक के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। प्रकरण गंभीर है, इसलिए गहनता से जांच की जा रही है। दस्तावेज एकत्रित किए जा रहे हैं। तथ्यों के आधार पर जो भी दोषी पाए जाएंगे उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-हिमांशु माथुर, सीओ सिटी