20 से 30 मिनट का इंतजार
रेलवे ट्रैक से मालगाड़ी या एक्सप्रेस ट्रेनों के गुजरने के दौरान फाटक बंद किया जाता है। तब दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। फाटक खुलने के बाद भी यातायात सामान्य होने में 20 से 30 मिनट लग जा रहा है।
दुर्घटना का खतरा
भारी वाहनों के गुजरने से उड़ती धूल के कारण दृश्यता (विजिबिलिटी) शून्य हो जाती है। इससे दोपहिया वाहन चालकों को कुछ नजर नहीं आता। कई पटरी की ओर फिसलकर गिर भी रहे हैं। यह स्थिति बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
गांव के रास्तों पर कर रहे सफर
जाम और धूल से बचने के लिए स्थानीय लोग नजदीकी गांव के उबड़-खाबड़ और टेढ़े-मेढ़े कच्चे रास्तों से गुजरने के लिए मजबूर हैं। कभी-कभी कच्चे रास्तों पर वाहन फंस जा रहे हैं। इससे समय ज्यादा लग रहा है।
मरम्मत कराने के बजाय सीधे बंद कर दिया रास्ता
मेरा सासनी से जलेसर तक आना-जाना होता है। जब ओवरब्रिज चालू हुआ था तो लगा कि वर्षों पुरानी फाटक की समस्या खत्म हो गई, लेकिन दो माह में ही भ्रष्टाचार की पोल खुल गई। शिकायत के बाद रेलवे ने गड्ढे ठीक करने के बजाय सीधे रास्ता बंद कर दिया। अब ट्रेन आने पर धूल फांकते हुए लाइन में खड़ा रहना पड़ता है।-चंदपाल सिंह, निवासी नगला मया
कच्चे रास्ते पर सांस लेना दूभर, पलट रहे दोपहिया वाहन
पुल के नीचे जो सर्विस रोड बनाया गया है वह पूरी तरह कच्चा और बदहाल है। भारी ट्रक और डंपर गुजरते हैं तो धूल का ऐसा गुबार उठता है कि आगे कुछ नजर नहीं आता। दोपहिया वाहन चालक लगातार फिसलकर गिर रहे हैं। रेलवे अधिकारियों की गैरजिम्मेदारी के कारण एक माह बाद भी मरम्मत का काम पूरा नहीं हुआ है।-मनोज कुमार, निवासी मान महौ
पिलर से संकरा हुआ रास्ता, गांव से जाने की मजबूरी
ओवरब्रिज का पिलर बनने के बाद नीचे फाटक के पास रास्ता पहले की तुलना में बहुत संकरा हो चुका है। कार या बड़ी गाड़ियों के घंटों फंसे रहने का डर रहता है। कई बार जरूरी काम होने पर हमने 5-6 किलोमीटर घूमकर गांव के संपर्क मार्गों का सहारा लिया, लेकिन वहां भी जोखिम कम नहीं है।-सुधीर कुमार, निवासी गांव बघराया