क्षेत्र के गांव बिशुनदास निवासी रितेश (32) के अपहरण और हत्या के आरोप में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों के मृतक के छोटे भाई की पत्नी से संबंध थे। रितेश को इन लोगों के घर आने-जाने पर आपत्ति थी, इसलिए इन लोगों ने उसे रास्ते से हटाने की योजना बनाई थी।
मृतक रितेश उर्फ छोटू (32) 13 मार्च को घर से लापता हो गया था। उसकी गुमशुदगी दूसरे दिन मृतक के चाचा कोमल सिंह ने कोतवाली में दर्ज कराई थी। रितेश का शव 22 मार्च को गांव के निकट करबन नदी में क्षत-विक्षत हालत में मिला था। मृतक के भाई जितेंद्र सिंह पुत्र सुग्रीव सिंह ने गांव के ही प्रधान दयाल सिंह सहित उनके एक बेटे और दो भतीजों के खिलाफ अपहरण और हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पुलिस अधीक्षक चिरंजीवनाथ सिन्हा ने इस घटना के खुलासे के लिए एसओजी सहित पुलिस की पांच टीमों को लगाया था। 16 अप्रैल को एसओजी और मुरसान पुलिस की संयुक्त टीम ने थाना मुरसान क्षेत्र से दो आरोपियों मूलचंद उर्फ मोहित उर्फ मूला और विमल उर्फ बिल्ला निवासी गांव बिशुनदास को गिरफ्तार किया।
कोतवाली प्रभारी वीरेंद्र प्रताप गिरी का कहना है कि आरोपियों ने बताया कि उनका मृतक रितेश के भाई जितेंद्र की पत्नी से संपर्क था और वे अक्सर फोन पर घंटों तक बात करते थे। जितेंद्र की पत्नी जितेंद्र की रिश्ते में सगी साली है। जितेंद्र गुरुग्राम में ड्राइवर का काम करता है और अक्सर घर से बाहर रहता था।
13 मार्च को रात करीब साढ़े नौ बजे मूलचंद उर्फ मोहित जितेंद्र की पत्नी के घर पर मौजूद था। तभी रितेश उर्फ छोटू शराब के नशे में मोटरसाइकिल की चाभी लेने घर के अंदर आया और मूलचंद को देखकर कहासुनी करने लगा।
कोतवाली प्रभारी ने बताया कि मूलचंद ने जितेंद्र की पत्नी की मदद से गमछे से रितेश का मुंह दबा दिया, जिससे दम घुटने से उसकी मौत हो गई। इसके बाद जितेंद्र की पत्नी ने विमल को फोन कर बुलाया। दोनों ने मिलकर रितेश के शव को प्लास्टिक के बोरे में बंद किया और मोटरसाइकिल से ले जाकर करबन नदी में फेंक दिया था। इस मामले में आरोपी महिला फरार है।