बारिश से जगह-जगह जलभराव हो गया है, जिससे मलेरिया और डेंगू का खतरा मंडराने लगा है। स्वास्थ्य विभाग ने जिले के 41 गांवों और शहरी बस्तियों को बेहद संवेदनशील घोषित किया है, जिनकी विशेष निगरानी की जा रही है। जिले में अब तक मलेरिया के चार मरीज मिल चुके हैं।
जमा हुए पानी ने मच्छरों को पनपने का मौका दे दिया है। जिला अस्पताल की ओपीडी में आने वाले अधिकांश मरीजों में तेज बुखार, बदन दर्द और उल्टी जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं।
फिजिशियन कक्ष के बाहर मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं, जिन मरीजों में मलेरिया और डेंगू के लक्षण दिख रहे हैं, उनकी जांच कराई जा रही है। रोजाना मलेरिया और डेंगू की 60 से 70 जांचें कराईं जा रही हैं। फिजिशियन डॉ. अवधेश कुमार ने बताया कि लोग वायरल बुखार की चपेट में भी आ रहे हैं।
41 संवेदनशील इलाकों पर नजर
पिछले वर्ष डेंगू के 19 और मलेरिया के 22 मरीज मिले थे। इन मरीजों से संबंधित 41 इलाकों को संवेदनशील घोषित किया गया है। जिसमें कुछ गांव और शहरी बस्तियां शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें इन इलाकों में लगातार फॉगिंग, एंटी-लार्वा रसायन का छिड़काव कर रही हैं। घर-घर सर्वे कराया जा रहा है।
अब तक मलेरिया के चार मरीज मिले
जिले में अब तक मलेरिया के चार मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। इन सभी मरीजों के इलाकों पर भी नजर रखी जा रही है। चारों जगह एंटी-लार्वा रसायन का छिड़काव हो चुका है। राहत की बात यह है कि अभी तक डेंगू का कोई मामला सामने नहीं आया है।
अब तक मलेरिया के चार मरीज मिले
जिले में अब तक मलेरिया के चार मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। इन सभी मरीजों के इलाकों पर भी नजर रखी जा रही है। चारों जगह एंटी-लार्वा रसायन का छिड़काव हो चुका है। राहत की बात यह है कि अभी तक डेंगू का कोई मामला सामने नहीं आया है।
बचाव के उपाय
-कूलर, गमलों और पुराने टायरों में जमा पानी को तुरंत साफ करें।
-पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें और सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें।
-बुखार आने पर खुद से दवा लेने के बजाय स्वास्थ्य केंद्र पर जांच कराएं।
सभी संवेदनशील इलाकों में टीम भ्रमण कर रही हैं। घर-घर जाकर भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जहां लोग बीमार मिल रहे हैं, उनकी जांच कराई जा रही है। इस समय सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
-डॉ. वेदप्रकाश, सीएमओ।