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Hathras News: गलघोंटू का खतरा.. छूटे बच्चों को लगेगा डिप्थीरिया का टीका

Wed, 05 Aug 2026 02:17 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
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प्रतीकात्मक चित्र। - फोटो : Archive
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स्वास्थ्य व शिक्षा विभाग ने जानलेवा गलघोंटू (डिप्थीरिया) व टिटनेस से बच्चों के बचाव के लिए चार दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत की है। अप्रैल में चले 10 दिवसीय अभियान में छूटे 12 हजार बच्चों के डिप्थीरिया व टिटनेस के टीके लगने हैं। तीन महीने पहले चले अभियान में 20,500 बच्चों को टीडी के टीके लगे थे।
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विद्यालय स्तर पर चल रहे इस अभियान में पहले दिन सोमवार को 48 विद्यालय में 3500 बच्चों को टीडी व डीपीटी की बूस्टर डोज लगाई गई थी। अभियान की शुरुआत से पहले प्रधानाचार्यों के साथ बैठक कर टीकाकरण की रूपरेखा साझा की जा चुकी है। डिप्थीरिया के लिए कक्षा एक और टिटनेस के लिए कक्षा पांच व 10 के विद्यार्थी लक्षित किए गए हैं।
टीकाकरण सत्र बुधवार व शनिवार को छोड़कर विद्यालयों में टीके लगाए जाएंगे। प्रारंभिक तौर पर चार दिवस निर्धारित किए गए हैं, लेकिन लक्ष्य के सापेक्ष दिन बढ़ाए जा सकते हैं।
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संक्रामक बीमारी है गलघोंटू
डिप्थीरिया यानी गलघोंटू संक्रामक बीमारी है। ये बैक्टीरिया से होती है। इसमें नाक-गले में संक्रमण का खतरा रहता है। डीपीटी बूस्टर से बीमारी से बचाव होता है। बुखार, जुकाम, सिर में दर्द, नाक बहा, गले की ग्रंथियों में सूजन, गले में झिल्ली बनना, कमजोरी और पेट खराब आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं।


टिटनेस में तंत्रिका तंत्र पर होता है हमला
टिटनेस की बीमारी क्लोस्ट्रीडियम टेटानी नामक बैक्टीरिया के कारण होती है। यह बैक्टीरिया आमतौर पर मिट्टी, धूल, गोबर और जंग लगी लोहे की वस्तुओं या औजारों में पाए जाते हैं। घाव के जरिये यह शरीर में पहुंचता है। यह बैक्टीरिया एक खतरनाक विष छोड़ते हैं जो सीधे तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है, इसलिए इसकी बूस्टर डोज दी जाती है।

टीके का प्रकार और आयु वर्ग:
5-6 वर्ष (कक्षा 1) : डीपीटी-2 बूस्टर खुराक।
10 वर्ष (कक्षा 4-6) : टीडी-10 टीका।
16 वर्ष (कक्षा 10-11) : टीडी -16 टीका।


डिप्थीरिया व टिटनेस से बचाव के लिए समय-समय पर विशेष कार्यक्रम चलाए जाते हैं। नियमित टीकाकरण से छूटे बच्चों को चिह्नित किया जाता है जिन्हें स्कूलों में टीके लगाए जाते हैं। इस अभियान में स्कूल के सहयोग से सभी छूटे बच्चों को बूस्टर डोज दी जाएगी।
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-डॉ. एमआई आलम, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी
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