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Hathras News: आंधी-बारिश से बिछी धान-बाजरा की पकी फसल, रो पड़े किसान

Sat, 19 Sep 2026 02:37 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
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फसल का हाल देखकर बिलखता किसान। स्रोत : वीडियोग्रैब - फोटो : Videograb
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साहब! इस फसल से बहुत उम्मीद थी...दिन-रात मेहनत की थी, लेकिन एक झटके में सब बर्बाद हो गया। अब लागत कैसे निकलेगी और घर कैसे चलाएंगे। यह बताते हुए गांव नगला फत्ता के किसान सुरेशचंद्र और दिनेश फफक पड़े। यह दर्द इन दोनों का ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के उन सभी किसानों काहै, जिनकी फसल बृहस्पतिवार शाम आई आंधी व बारिश से बिछ गई।
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दोनों भाइयों ने संयुक्त रूप से करीब 27 बीघा में धान की फसल तैयार की थी। फसल पककर कटाई के लिए लगभग तैयार थी और उन्हें इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन बृहस्पतिवार शाम को अचानक तेज आंधी के साथ हुई बारिश ने उनकी महीनों की मेहनत को खेतों में ही बिछा दिया।
शुक्रवार को जब वह खेत पर पहुंचे तो चारों तरफ धान की फसल जमीन पर बिछी दिखाई दी। पकी फसल का यह हाल देखकर सुरेशचंद्र और दिनेश फूट-फूटकर रोने लगे। किसानों के रोने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
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जंजरिया गांव के किसान जितेंद्र पुत्र मान सिंह की भी यही पीड़ा है। किसान जितेंद्र ने बताया कि उन्होंने करीब 16 बीघा में धान की फसल तैयार की थी। खेती के लिए कर्ज लिया था। उन्हें उम्मीद थी कि फसल अच्छी होगी तो लागत निकलने के साथ कर्ज भी चुका देंगे और परिवार के लिए कुछ बचत हो जाएगी, लेकिन आंधी-बारिश ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
जितेंद्र के मुताबिक अब उनके सामने कर्ज चुकाने की चिंता के साथ परिवार की आजीविका चलाने का भी संकट खड़ा हो गया है। गांव धानौटी के किसान यादराम ने बताया कि उन्होंने करीब 22 बीघा में धान की फसल की थी। खेती के लिए कर्ज लिया था और फसल से काफी उम्मीद थी, लेकिन अब कुछ नहीं बचा।यादराम का कहना है कि वह पूरी तरह खेती पर ही निर्भर हैं। फसल प्रभावित होने के बाद अब परिवार की आजीविका चलाना मुश्किल हो जाएगा। कर्ज चुकाने की चिंता अलग से सता रही है।

अब प्रशासन से मदद की आस ग्रामीण क्षेत्रों में आंधी-बारिश का असर कई खेतों में साफ दिखाई दे रहा है। धान के साथ बाजरा की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। जिन खेतों में कुछ दिन पहले तक लहलहाती और पकी फसल किसानों के चेहरे पर खुशी ला रही थी, वहीं अब खेतों में फसल जमीन पर बिछी नजर आ रही है। किसानों का कहना है कि कटाई से ठीक पहले फसल गिरने से उन्हें पैदावार और गुणवत्ता दोनों स्तर पर नुकसान की आशंका है। पीड़ित किसानों की मांग है कि प्रशासन और कृषि विभाग की टीम गांव-गांव पहुंचकर खेतों में हुए नुकसान का स्थलीय निरीक्षण करे और क्षतिग्रस्त फसलों का सर्वे कराया जाए, ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके।
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