जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए हुुए प्रतिष्ठापूर्ण उपचुनाव में दो दशक बाद मंगलवार को बसपा को हार का मुंह देखना पड़ा। संयुक्त विरोधी दलों की प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ीं सपा की जिलाध्यक्ष ओमवती यादव ने रोमांचक मुकाबले में बसपा नेता रामवीर उपाध्याय के छोटे भाई रामेश्वर उपाध्याय को एक वोट से हरा दिया। ओमवती को 13 और रामेश्वर को 12 वोट मिले हैं।
मंगलवार को तयशुदा कार्यक्रम के तहत उपचुनाव कराया गया। कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान की प्रक्रिया शुरू कराई गई। पहले ओमवती यादव अपने साथ 15 सदस्यों को लेकर मतदान करने पहुंचीं तो उनकी जीत के आसार साफ दिखने लगे। इसके बाद रामेश्वर उपाध्याय अपने 10 सदस्यों के साथ मतदान के लिए पहुंचे। दोपहर एक बजे तक सभी 25 सदस्यों ने मताधिकार का प्रयोग किया। दोपहर तीन बजे दोनों प्रत्याशियों की मौजूदगी में वोटों की गिनती कराई गई और 10 मिनट के भीतर नतीजा घोषित कर दिया गया। हालांकि ऐनवक्त पर ओमवती खेमे के दो सदस्यों ने क्रॉस वोटिंग कर दी, जिससे उनकी जीत का अंतर महज एक वोट ही रह गया। डीएम अमित कुमार सिंह व एसपी घुले सुशील चंद्रभान समेत आला प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी पूरे समय मौजूद रहे।
वर्ष 2016 में हुए जिला पंचायत अध्यक्ष के आम चुनाव में भी ओमवती यादव का मुकाबला पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाई विनोद उपाध्याय से हुआ था। कश्मकश के बाद विनोद उपाध्याय ने ओमवती यादव को एक वोट से हराया था। उस समय विनोद को 13 और ओमवती को 12 वोट मिले थे। मार्च 2017 में जब प्रदेश में सत्ता बदली तो भाजपा की मदद से सपा और राष्ट्रीय लोकदल के सदस्यों ने मिलकर जिला पंचायत अध्यक्ष विनोद उपाध्याय के खिलाफ 14 जून 2017 को अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। 15 सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था, जबकि इसके खिलाफ किसी ने मतदान नहीं किया। राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर उपचुनाव कराने की अधिसूचना जारी की थी।