क्षेत्र के किसान चार दिनों से हो रही बारिश से हुए नुकसान से उबर भी नहीं पाए थे कि शनिवार को गांव मढ़ाका, खोंड़ा और बुढ़ाइच में रजबहा की पटरी कटने से 300 बीघा शकरकंद, बाजरा, धान आदि की फसल बर्बाद हो गई। करीब तीन घंटे तक राजस्व व सिंचाई विभाग की टीम के नहीं पहुंचने से किसानों में नाराजगी दिखी।
गांव मढ़ाका के पास बहने वाले परसौरा रजबहा की पटरी के कटने से कैलाश पचौरी की आठ बीघा धान, यतेंद्र शर्मा की आठ बीघा धान, ब्रजमोहन शर्मा की छह बीघा बाजरा की फसल जलमग्न हो गई। इसके बाद गांव खोंडा में गांव के नजदीक ही खोंड़ा माइनर की पटरी कटने से इस गांव के अजीत पचौरी, चंद्रपाल पचौरी, राजकुमार पचौरी, शैलेंद्र सिंह, राम प्रकाश, महावीर सिंह, कैलाश पचौरी, लोकेंद्र सिंह, राजपाल पचौरी, जयवीर सिंह और बच्चू सिंह की करीब 200 बीघा शकरकंद, धान और बाजरा की फसल जलमग्न हो गई। किसानों को कहना है कि धान की फसल तो बच सकती है, लेकिन बाजरा एवं शकरकंद की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई। उनको करीब 50 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। गांव बुढ़ाइच के पास शनिवार को सुबह सात बजे मुख्य सहपऊ रजबहे की पटरी कटने से किसानों की लगभग 100 बीघा बाजरा की फसल जलमग्न हो गई और करीब 50 बीघा खाली पड़े खेतों में रजबहे का पानी भर गया। गांव निवासी किसान भूरी सिंह की पांच बीघा, सुरेशचंद्र की सात बीघा, बंटू की पांच बीघा, महेश की पांच, गुड्डा पंडित 14, रायरूप की 5, मवासीराम की पांच, सुधाकर दरोगा की छह, नगला मेवा के हाकिम सिंह की नौ, डालचंद की चार, सत्यवीर की सात, दीपचंद की छह, राजबहादुर की आठ, नेत्रपाल की चार, हाकिम सिंह की नौ, छोटेलाल की छह, सुल्तान सिंह की 10, कुबेर सिंह की सात, सज्जन सिंह की चार बीघा बाजरा की फसल जलमग्न हो गई।
ग्रामीणों ने बताया कि सभी ने मिलकर पानी की रोकथाम का प्रयास किया। सिंचाई विभाग को भी इसकी सूचना दी, लेकिन तीन घंटे बाद विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों की मदद से पटरी की रोकथाम की गई।
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नगला बेनी के पास अधिक पानी से डूबी पुल की पटरी
हाथरस से निकली नहर में गांव नगला बेनी के पास अधिक पानी आने से दोहई और उधैना के मध्य बने पुल के पास ही नहर का पानी पटरी के ऊपर से बहने लगा। लोगों ने इसकी सूचना सिंचाई विभाग की दी। ग्रामीणों ने मिट्टी से भरे कट्टे रखकर पानी की रोकथाम कर ली, वरना यहां भी फसलों में नुकसान हो सकता था। ग्रामीणों का कहना है कि इस बार क्षेत्र के सभी रजबहों, माइनरों और नहर में पानी की मात्रा अधिक है। इस कारण जगह-जगह पटरियां कट रही हैं।
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मैंने घरेलू उपयोग के लिए पांच बीघा बाजरा की फसल की थी। पटरी कटने से उसमें पानी भर गया है। इससे काफी नुकसान हुआ है। यदि हवा चली तो फसल गिर जाएगी और उसमें से बाजरा का एक भी दाना हमें नसीब नहीं होगा।
-भूरी सिंह, बुढ़ाइच
मैंने पांच बीघा भूमि पर बाजरा की फसल बोई थी। बारिश ने पहले ही उसमें काफी नुकसान कर दिया और अब बची हुई फसल को रजबहे के पानी ने बर्बाद कर दिया। हमारे लिए खाने के साथ पशुओं के लिए चारे की समस्या खड़ी हो गई है।
-बंटू, बुढ़ाइच
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