उन्होंने बताया कि परिजनों और रिश्तेदारों में पति के मौत के बाद देवर विजय कुमार से शादी करा दी थी। विजय कुमार मामले की पैरवी करते रहे, लेकिन कुछ समय बाद उनकी भी मौत हो गई। परिवार में पैरवी करने वाला कोई नहीं रहा तो राधादेवी ने न्यायालय के चक्कर काटे, लेकिन आरोपियों के हाजिर न होने और पुलिस के अत्यधिक दबाव के कारण उनकी हिम्मत टूट गई।
राधादेवी का कहना है कि पुलिस अपने ही विभाग के कर्मचारियों को नहीं ढूंढ पाई। कई गवाहों की भी मृत्यु हो गई। वह पुलिस से उम्मीद छोड़ चुकी हैं। अब केवल न्यायालय से आस है। वह इस साल आठ मई को न्यायालय पहुंची थी और अपने अंतिम बयान दर्ज कराए थे।
कोर्ट ने किया अवसर समाप्त
आरोपी पुलिस कर्मियों के हाजिर न होने से नाराज कोर्ट ने नवंबर माह में इनके साक्ष्य का अवसर समाप्त कर दिया है। अगली तिथि 15 दिसंबर लगी है। कोर्ट ने डीएम एसपी को 28 नवंबर 2024, 4 जनवरी 2025 व 5 मार्च 2025 को पत्र लिखे थे, लेकिन पुलिस ने लापता गवाह व आरोपी पुलिस कर्मियों को खोजने में कोई रुचि नहीं दिखाई गई।
एक दारोगा कर रहा तारीख
चार्जशीट दाखिल होने के बाद कुछ तारीखों तक विजय व रणधीर सिंह आदलत में हाजिर हुए, लेकिन जमानत लेने के बाद ये भी फिर कोर्ट में नहीं दिखे। केवल एसआई भरत सिंह आज तक तारीखों पर आ रहे हैं। 29 नवंबर को भी वे कोर्ट पहुंचे। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता ने बताया बाकी सात आरोपी कहां और किस हालत में हैं, इसकी कोई सूचना न्यायालय को नहीं दी गई है, जबकि इनकी कुर्की वारंट तक हो चुके हैं।