इफको के गेहूं क्रय केंद्र पर लटके ताले।
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हाथरस। गेहूं खरीद शुरू हुए 24 घंटे से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन जिले में ज्यादातर क्रय केंद्र अभी तक चालू ही नहीं हो सके हैं। ग्रामीण क्षेत्र की तो बात छोड़ दें, मंडी समितियों के क्रय केंद्रों पर अभी तक सन्नाटा पसरा हुआ है। यहां न तो अभी तक बैनर लगाए गए हैं और न हीं कांटा-बांट दिख रहे हैं। ऐसा नहीं है कि मंडियों में गेहूं की आवक शुरू नहीं हुई है। इस बार समय से पहले ही फसल पकने से बाजार में गेहूं की आवक भी शुरू हो चुकी है। मंडी में आढ़तियों के फड़ों पर खूब गेहूं की तुलाई हो रही है। रेट भी समर्थन मूल्य से कम मिल रहा है। जो किसान क्रय केंद्रों पर ही गेहूं बेचना चाहते हैं, उन्हें मजबूरी में अपना गेहूं आढ़तियों को ही नुकसान पर बेचना पड़ रहा है। क्रय केंद्र शुरू नहीं होने से किसानों में नाराजगी है। उनका कहना है कि आढ़तियों और बड़े कारोबारियों से मिलीभगत के चलते क्रय केंद्र शुरू करने में जानबूझकर देरी की जा रही है, जबकि फसल इससे पहले से ही मंडियों में आ रही है। क्रय केंद्रों पर पसरा सन्नाटा जिला प्रशासन की गेहूं खरीद की तैयारियों की भी पोल खोल रहा है।
हमारे यहां गेहूं की आवक तो दो दिन से चल रही है। हम किसान को समर्थन मूल्य से ज्यादा रेट दे रहे हैं, इसलिए किसान हमारे यहां गेहूं बेच रहे हैं।
-योगेश कुमार, आढ़ती
हम यहां इसी आस में गेहूं लेकर आए थे कि सरकारी क्रय केंद्र पर बेचेंगे, लेकिन दोनों में से कोई क्रय केंद्र नहीं खुला है। मजबूरी में आढ़तियों को गेहूं बेचकर जा रहे हैं।
-रामगोपाल, किसान सुरीर
हजारों रुपये का भाड़ा खर्च करके गेहूं को यहां तक लाए हैं। जब क्रय केंद्र नहीं खुला है तो प्राइवेट में इसे बेचना हमारी मजबूरी है। और फिर हमें पैसे की सख्त जरूरत है।
-ज्वाला प्रसाद, परसारा
सभी क्रय एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने सेंटर तुरंत चालू कराएं और वहां कांटा-बाट के साथ सभी सुविधाएं भी उपलब्ध कराएं, जिससे किसान को गेहूं बेचने में परेशानी नहीं हो।
-धीरेंद्र प्रताप सिंह, एडीएम