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Hathras News: देश-विदेश में बजाया पं. नथाराम गौड़ ने स्वांग का डंका, 200 साल पुरानी है यह विधा

Sat, 14 Jan 2023 05:35 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

हाथरस जन्मे स्वांग सम्राट पं. नथाराम गौड़ ने स्वांग का डंका देश के साथ विदेश तक में बजाया। उन्होंने स्वांग के माध्यम से लोगों को देश भक्ति का संदेश दिया और समाजसुधारक की भूमिका भी निभाई। विदेश में कई विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों ने अपने शोध में पंडित जी की रचनाओं को शामिल किया है। कई पुस्तकालयों में उनकी रचनाएं सुरक्षित हैं।  
 
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स्वांग सम्राट पं. नथाराम गौड़ - फोटो : साेशल मीडिया
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विस्तार
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हाथरस में जन्मे स्वांग सम्राट पं. नथाराम गौड़ ने स्वांग का डंका देश के साथ विदेश तक में बजाया। आज उनकी 150 वीं जयंती है। रंगमंच की दुनिया पं.नथाराम गौड़ की प्रतिभा की कायल रही। उन्होंने स्वांग के माध्यम से लोगों को देश भक्ति का संदेश दिया और समाजसुधारक की भूमिका भी निभाई। विदेश में कई विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों ने अपने शोध में पंडित जी की रचनाओं को शामिल किया है। कई पुस्तकालयों में उनकी रचनाएं सुरक्षित हैं।  

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स्वांग के युगपुरुष पं. नथाराम गौड़ का जन्म 14 जनवरी 1874 को हाथरस जंक्शन के गांव दरियापुर में हुआ था।  पं. नथाराम गौड़ जब हाथरस आए तो इंद्रमन स्वांग अखाड़े के कलाकार चिरंजीलाल से उनकी मुलाकात हुई। तब से वह स्वांग विद्या से जुड़ गए। इसके बाद उन्होंने स्वांग के क्षेत्र में अपनी धाक जमा ली। उन्होंने अपनी एक व्यावसायिक मंडली भी बना ली। पंडित जी खुद स्वांग लिखते और यह मंडली स्वांग का मंचन करती। मंडली ने अपने देश में ही नहीं, बल्कि अमेरिका, इंडोनेशिया, मारीशस, फिजी आदि देशों में स्वांग का डंका बजाया। जानकार बताते हैं कि कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी ई बुक्स लाइब्रेरी और शिकागो यूनिवर्सिटी की रेगेस्टीन लाइब्रेरी में वहां के विद्यार्थियों ने अपने शोध में पं. नथाराम की रचनाएं शामिल की हैं। 

उनकी रचनाओं को लंदन स्थित ऑफिस लाइब्रेरी और ब्रिटिश म्यूजियम में भी रखा गया है। पहले मनोरंजन के साधन वर्तमान की तरह तो नहीं थे। लिहाजा प्राचीन लोक नाट्य विधा स्वांग काफी लोकप्रिय हो गई। करीब 200 साल पुरानी इस विद्या की देश-विदेश में धूम रही। हालांकि नथाराम गौड़ के समय में कई अखाड़े थे, लेकिन सबसे ज्यादा ख्याति नथाराम के अखाड़े ने ही पाई। उन्होंने अपने समय में स्वांग को देशभक्ति और समाज सुधार के संदेश का माध्यम बना दिया। पं. नथाराम ने भक्त पूरनमल, संगीत रामायण, महाभारत, कत्लजान आलम, समर केसरी, अमर सिंह राठौर, महारानी तारा, सत्यवादी हरीशचंद्र, वीरांगना वीरमती, दिल्ली दरबार, नरसी का भात जैसे सैकड़ों स्वांग की रचना की।
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एक जमाना था कि जब मेरे परदादा पं. नथाराम गौड़ श्याम प्रेस में स्वांग लिखते थे। हर नया साल कथानक लिखकर देवछठ के मेले में इसे मंचित कराते थे। फिर घूम घूमकर देश-विदेश में मंचन के माध्यम से हाथरस का नाम रोशन किया करते थे। हमें उनके वंशज होने पर अत्यंत गर्व है। उनका साहित्य अब  सोशल मीडिया पर लोड किया जा रहा है, जिससे लोग इस स्वांग विधा के बारे में जान सकें। नगर पालिका प्रशासन ने अलीगढ़ रोड का नाम पं. नथाराम गौड़ के नाम पर किया है। इसके लिए निवर्तमान पालिकाध्यक्ष आशीष शर्मा का हम आभार जताते हैं।  -राहुल गौड़, प्रपौत्र पं. नथाराम गौड़।

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सोशल मीडिया पर अपलोड की जाएंगी पुस्तकें

पं. नथाराम गौड़ शोध संस्थान द्वारा उनकी लिखी गई 200 से अधिक पुस्तकों को अब बदलते समय में सोशल मीडिया पर अपलोड किया जाएगा, ताकि युवा पीढ़ी भी पं. नथाराम के स्वांग के बारे में जान सके। उनके प्रपौत्र राहुल गौड़ ने पं. नथाराम गौड़ को पद्मश्री दिलाने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। इस संबंध में जल्द ही वह सीएम से समय लेकर मिलेंगे। 

यह होता है स्वांग
स्वांग एक लोकनाट्य रूप है, जिसमें किसी रूप को स्वयं में आरोपित कर उसे प्रस्तुत किया जाता है। किसी विशेष, ऐतिहासिक या पौराणिक चरित्र, लोकसमाज में प्रसिद्ध चरित्र या देवी, देवता की नकल में स्वयं का शृंगार करना, उसी के अनुसार वेशभूषा धारण करना एवं उसी के चरित्र विशेष के अनुरूप अभिनय करना है। 
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