संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
सैन्य अभ्यास के दौरान शहीद हुए सूरजपाल की पत्नी ज्योति ने कहा है कि उन्हें अपने पति पर गर्व है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से पति ने देश की सेवा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए है, उसी तरह समय आने पर अपने बेटे को देश सेवा के लिए समर्पित करने पर मुझे गर्व होगा। शहीद सूरजपाल का बेटा डेढ़ साल का है। परिजनों की मांग है कि कोटा रोड का नाम सूरजपाल के नाम पर रखा जाए और शहीद की स्मृति में द्वार भी बनाया जाए।
नंदराम नगरिया निवासी सूरजपाल पचौरी (32) पुत्र रामचरन की तैनाती आगरा में 252 एडीडी पैरा बटालियन में पैरा कमांडो के रूप में थी। शनिवार की सुबह जब सूरजपाल लद्दाख में सैन्य अभ्यास कर रहे थे तो उनका पैराशूट नहीं खुल सका और उनका निधन हो गया। इसकी जानकारी मिलते ही उसके गांव में कोहराम मच गया था।
रविवार को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया था। सूरज के डेढ़ साल के बेटे शौर्य ने अपने पिता को मुखाग्नि दी थी। सूरज अपने पीछे पत्नी, डेढ़ साल के बेटे शौर्य के अलावा पांच वर्ष की तान्या और तीन वर्ष की काव्या को छोड़ गए।
तीसरे दिन भी सूरज के घर पर परिजनों को सांत्वना देने वालों का तांता लगा गया। वहीं, उनकी पत्नी ज्योति के आंसू नहीं थम रहे। सूरज से ज्योति की शादी वर्ष 2014 में हुई थी। ज्योति का कहना है कि उनके पति का जीवन देश के काम आया। इस पर उसे गर्व है। समय आने पर वह अपने बेटे को भी देश सेवा के लिए समर्पित करना चाहेंगी।
2009 में भर्ती हुआ था सूरजपाल
शनिवार को सूरज 32 हजार फीट की ऊंचाई से जंप कर रहा था, तब वह पैराशूट न खुलने की वजह से शहीद हुआ था। सूरज को आसमान से नीचे जंप करने में महारत हासिल थी। परिजनों ने बताया कि सूरज वर्ष 2009 में इंडियन आर्मी में भर्ती हुआ था और एक साल के अंदर ही प्रशिक्षण के दौरान उसका चयन पैराकमांडो के रूप में हो गया था।
सीएम के आदेश को अमलीजामा पहनाने में जुटा प्रशासन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शहीद के परिजनों को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने, शहीद के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और एक सड़क का नाम शहीद के नाम पर करने की घोषणा की है। सीएम के इस आदेश के बाद स्थानीय प्रशासन इस आदेश को अमलीजामा पहनाने में जुटा है। संवाद