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Hathras News: शीतगृहों में आलू भंडारण किराये में वृद्धि का विरोध, नारेबाजी

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शीतगृहों में आलू भंडारण का किराया 20 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाने के निर्णय से क्षेत्र के किसानों में आक्रोश है। सोमवार को गांव जटोई में काफी संख्या में किसानों ने किराया वृद्धि का विरोध करते हुए नारेबाजी की। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि किराये में वृद्धि की गई तो किसान धरना प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगे। गौर हो कि बीती 30 जनवरी को लखनऊ में हुई कोल्ड स्टोर एसोसिएशन की बैठक में किराया वृद्धि का एलान किया गया है।
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किसानों ने कहा कि शीतगृहों में आलू भंडारण की दरों में की गई वृद्धि आपत्तिजनक है। सोची समझी रणनीति के तहत भंडारण के लिए आलू को वर्गीकृत कर दिया गया है, जबकि भंडारण में चाहे जिस किस्म का आलू हो, उससे कोई असर नहीं पड़ता। आलू का वर्गीकरण कर किराये में वृद्धि करना किसानों का शोषण करने का नया रास्ता है, जिसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। किसान पहले से ही किराया वृद्धि से परेशान है। अब अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का प्रयास किया जा रहा है। यह किसान हित में नहीं है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी चाहिए कि वह किसानों की आवाज को सरकार तक पहुंचाएं और किराया वृद्धि को स्थगित कराएं। विरोध जताने वालों में जगवीर चौधरी, बंगाली बाबू, सूरज चौधरी, ललतेश, सुभाष चौधरी, शिवा चौधरी, ओमप्रकाश कुशवाह, पप्पू चौधरी, सतेंद्र चौधरी, धर्मेंद्र, हरेंद्र, मुकेश, संजू आदि थे।
बातचीत-
- हर साल शीतगृह संचालक आलू भंडारण के किराए में वृद्धि कर देते हैं, इससे किसानों का शोषण होता है, जबकि कई बार फसल में किसान को घाटा सहन करना पड़ता है। बंगाली बाबू, किसान, जटोई।
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- न बिजली की दरें बढ़ी और न कोल्ड वालों का कोई अतिरिक्त खर्चा बढ़ा, फिर ये आलू भंडारण का किराया बढ़ाने का विचार कहां से आया। यह सिर्फ किसानो का शोषण करना ही प्रतीत होता है। भोला, किसान, गढी इंच्छा।
- वैसे भी फसल की लागत बड़ी मुश्किल से निकल पाती है, ऊपर से ये शीतगृह वाले आलू भंडारण करने का किराया बढ़ा रहे हैं, यह तो सरासर नाइंसाफी है और किसानों का शोषण है। जगदीश कुमार, किसान।
- आलू भंडारण का यदि इस बार किराया बढ़ाया गया तो उसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को चाहिए कि वह किसान हित में निर्णय ले। किसान संगठन भी किसानों की आवाज उठाने को आगे आएं। चंद्रपाल, किसान, जटोई।
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