ईंट के दामों में एकाएक आए उछाल के कारण आम आदमी के लिए अब आशियाना बनाना महंगा हो गया है। निर्माण कार्य करा रहे लोगों को महंगी दरों पर ईंटें खरीदनी पड़ रही हैं। प्रदूषण को कम करने के लिए शासन के निर्देश पर जिग जैग प्रणाली से ईंट-भट्ठा बनाकर संचालन करने के कारण इस सीजन में भट्ठे नहीं संचालित हो सके हैं। इस कारण ईट पर दिन पर दिन महंगाई बढ़ती जा रही है।
जिले में करीब 200 भट्ठे हैं। इनमें से 78 भट्ठों को शासन की ओर से मानक के आधार पर संचालित न होने के कारण प्रतिबंधित कर दिया गया था। इस सीजन में ईंट भट्ठों के बंद होने के कारण अब इंट के रेट आसमान छू रहे हैं। जिग जैग प्रणाली पर भट्ठे बनाकर संचालन करने के निर्देश के कारण जिले में इस सीजन में भट्ठे संचालित नहीं हो सके हैं। 4200 रुपये प्रति एक हजार की दर पर मिलने वाली ईंटें अब 6200 रुपये प्रति हजार मिल रही हैं।
भट्ठों का इस बार संचालन न होने के कारण ईंटों के दामों में तेजी आ गई है। दिन-प्रतिदिर्न इंटों के रेट बढ़ते जा रहे हैं। इस कारण मकानों पर काम शुरू होने के कारण महंगी ईंटें भी खरीदनी पड़ रही हैं।
-आशू शर्मा, गुमानपुर
भट्ठों पर ईंट खत्म होती जा रही हैं। इस कारण ज्यादा दामों पर ईंट खरीदनी पड़ रही हैं। भट्ठों पर ईंट न होने बहुत परेशानी से गुजरना पड़ रहा है।
-सुरेश चंद्र, मूंगसा
भट्ठों पर जीएसटी लगने, जिग जैग भट्ठा बनाए जाने सहित अन्य कारणों के चलते ईंट भट्ठे बंद पड़े हैं। इस कारण भट्ठा स्वामियों को काफी नुकसान से गुजरना पड़ रहा है। भट्ठों पर ईंटें खत्म हो गई हैं।
-मुकेश दीक्षित, भट्ठा संचालक