शहर की एक दुकान पर बच्चों के लिए राधाकृष्ण की पोशाक खरीदतीं महिलाएं। संवाद
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इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर अपने बच्चों को राधा और कृष्ण का रूप देने के लिए शहर से लेकर देहात क्षेत्र तक की महिलाएं बेहद उत्साहित नजर आ रही हैं। अपने लाल और लाडली को नंदलाल व लाडली जी का स्वरूप देने के लिए महिलाओं ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं।
त्योहार को ध्यान में रखते हुए शहर के प्रमुख बाजारों में बच्चों की राधा-कृष्ण वाली विशेष पोशाकों और शृंगार सामग्री की दुकानों पर महिलाओं की भीड़ उमड़ रही है। छोटी-छोटी धोती-कुर्ता, पीतांबरी ड्रेस, राजस्थानी घाघरा-चोली और बनारसी शैली की पोशाकों की जमकर खरीदारी की जा रही है। दुकानदारों ने भी बच्चों के शृंगार के लिए खास इंतजाम किए हैं।
पोशाकों के साथ-साथ बच्चों को सजाने के लिए मोरपंख वाले मुकुट, छोटी-छोटी बांसुरी, मोतियों की मालाएं, बाजूबंद, कुंडल, कमरबंद और घुंघरू की बिक्री में तेजी आई है। इसके अलावा बाल-राधा के लिए नथ, बिंदिया, चुंदरी और पायजेब के सेट भी बाजार में खूब पसंद किए जा रहे हैं।
व्यापारी शरद अग्रवाल का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस बार महिलाओं में अपने बच्चों को राधा-कृष्ण का रूप देने का क्रेज काफी बढ़ा है। प्ले स्कूल, कॉन्वेंट स्कूलों और सोसायटियों में आयोजित होने वाली फैंसी ड्रेस प्रतियोगिताओं के चलते भी इन पोशाकों की मांग में भारी इजाफा हुआ है। महिलाएं अपने बच्चों के लिए सबसे सुंदर और आकर्षक पोशाक चुनने में जुटी हुई हैं।