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पुराने पौधों की सुध नहीं, नए पौधे लगाने की तैयारी

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हाथरस में एमजी पॉलीटे​िक्नक के सामने सूखा पौधा। - फोटो : HATHRAS
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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अब वन विभाग ने अन्य विभागों की मदद से फिर से नए पौधे रोपने की तैयारी शुरू कर दी है। खास बात यह है अधिकांश पुराने पौधों की विभागों को सुधि नहीं है। ज्यादातर पौधों का रख रखाव के अभाव में अस्तित्व समाप्त हो गया है। पिछले वर्ष दस लाख 63 हजार 799 पौधे रोपे गए थे। अब इस साल करीब 20 लाख पौधों को रोपने की कवायद सोमवार से शुरू होगी। उल्लेखनीय है कि ज्यादातर विभागों ने रोपने के बाद पौधों की सुरक्षा पर कोई ध्यान नहीं दिया है, जिससे पौधे खत्म हो गए हैं।
वन विभाग का दावा हमारे पौधे सुरक्षित
हाथरस। वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो उनके द्वारा जटोई सादाबाद, जटोई हाथरस, समामई रुहल, हाथरस ब्रांच सहित कई स्थानों पर चार लाख चार हजार 70 पौधों का रोपण किया। अधिकांश पौधों पर लोहे के ट्री गार्ड लगे हुए हैं, जो एक स्थान पर लगे हुए हैं। उनकी लोहे के तार से बेरिकेडिंग की गई है। साथ ही पानी आदि देने के साथ उनकी समय से समय पर रोपाई भी की जा रही है। अधिकांश पौधे सुरक्षित हैं।
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6,59,799 पौधों की सुरक्षा भगवान भरोसे
दस लाख 63 हजार 869 पिछले वर्ष रोपण किया गया था, जिसमें करीब छह लाख 59 हजार 799 पौधे अन्य विभागें द्वारा लगाए गए थे। इनकी कई महीनों तक जीओ टैगिंग भी हुई। वर्तमान की बात करें तो इनमें अधिकांश पौधों का अस्तित्व समाप्त हो गया है या फिर वह भगवान भरोसे हैं। इस मामले में उप प्रभारी वन अधिकारी विमल कुमार का कहना है कि हमारे विभाग द्वारा जो पौधे लगाए गए थे, वह सुरक्षित है। अन्य विभागों द्वारा रोपे गए पौधों की जानकारी, उनके विभाग से मिलेगी। हालांकि जीओ टैगिंग सौ प्रतिशत हुई है।
फोटो खिंचाने के साथ पौधरोपण की इतिश्री
जिन विभागों को पौधरोपण का लक्ष्य दिया जाता है, उनके अधीनस्थ पौधरोपण करते हुए फोटो खिंचवाने के साथ उनकी तस्वीर अफसरों द्वारा बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप पर डालकर इतिश्री करते हैं। यदि इन पौधों की उनके द्वारा देखभाल की जाए तो निश्चित ही बृज की धरा हरियाली अधिक होगी।
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सोशल मीडिया पर पौधरोपण का प्रचार
पौधरोपण को लेकर सोशल मीडिया पर खूब वीडियो व फोटो डालकर लोगों से पौधे लगाने के लिए कहा जा रहा है। साथ ही लोगों को पौधे लगाने के फायदे भी बताए जा रहे हैं। तब भी पौधरोपण में इतनी रुचि लेते नहीं दिखाई दे रहे हैं।
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