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Potato: झुलसा रोग से 65 प्रतिशत आलू की फसल प्रभावित, दवाओं से नहीं हो रहा नियंत्रण, किसानों की चिंता बढ़ी

Tue, 06 Jan 2026 12:38 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस

सार

झुलसा एक फंगस जनित रोग है, जो सबसे पहले पौधों की ऊपरी पत्तियों को प्रभावित करता है। पत्तियां सूखने और गलने लगती हैं और धीरे-धीरे पूरा पौधा झुलस जाता है।
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आलू की फसल पर आया झुलसा रोग - फोटो : संवाद
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विस्तार
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आलू की खेती हाथरस जिले के किसानों की आय का प्रमुख आधार है, लेकिन इस बार झुलसा रोग ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है। यह रोग तेजी से फैल रहा है। अनुमान के मुताबिक लगभग 65 प्रतिशत फसल इसकी चपेट में आ चुकी है। घने कोहरे, पाले और दिन भर रहने वाली नमी से इस रोग को बढ़ा दिया है।

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जिले में लगभग 52 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की बुवाई की गई है, इसमें अगैती और पिछैती दोनों फसलें शामिल हैं। किसान झुलसा रोग से फसल को बचाने के लिए लगातार दवाओं का छिड़काव कर रहे हैं, लेकिन मौसम साफ न होने के कारण रोग पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।

किसान गंभीर सिंह, रामवीर सिंह और बबलू चौधरी का कहना है कि उनकी 3797 आलू की फसल करीब 50-55 दिन की है, इसमें झुलसा रोग लग चुका है। एक बार दवा का छिड़काव करने के बाद भी रोग थम नहीं रहा है। पहले ही बाजार में आलू के दाम गिर चुके हैं और अब फसल खराब होने की चिंता है।

आलू में अगैती और पिछैती झुलसा रोग होता है। इस वक्त आलू बड़ा हो रहा है, इसलिए पिछैती झुलसा का प्रकोप ज्यादा है। इसमें पत्तियों पर पानी जैसे धब्बे और बाद में काले धब्बे पड़ते हैं, जिससे पत्तियां मुरझा जाती हैं। पैदावार पर असर पड़ता है। बचाव के लिए मैटलेक्सिल और मैंकोजे का छिड़काव सही समय पर करते रहना चाहिए। खेत में पानी न रुकने दें।-विकास कुमार यादव, कृषि वैज्ञानिक।

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फंगस से फैलता है झुलसा रोग

झुलसा एक फंगस जनित रोग है, जो सबसे पहले पौधों की ऊपरी पत्तियों को प्रभावित करता है। पत्तियां सूखने और गलने लगती हैं और धीरे-धीरे पूरा पौधा झुलस जाता है। समय रहते नियंत्रण न होने पर यह रोग तेजी से एक से दूसरे खेत में फैल रहा है। बीते कुछ दिनों से घने कोहरे, पाला, सर्द हवाओं और नमी ने फंगस के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण दिया है। जिससे आलू के पौधे झुलसने लगे हैं।

दक्षिण भारत तक होती है मांग
सादाबाद के किसान बेहतरीन प्रजाति का 3797 आलू उगाते हैं, जिसकी गुणवत्ता और रखरखाव आसान माना जाता है। यही कारण है कि इस आलू की दक्षिण भारत में सालभर मांग रहती है और इसका निर्यात भी होता है। इसके अलावा हाथरस और सासनी तहसील में चिप्सोना, सूर्या और डायमंड प्रजाति के आलू की खेती होती है, जिनकी मांग दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में होती है।
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