खोदाई से पूर्व ही व्यापारी खेतों का मुआयना ले कर रहे हैं सौंदा
कुछ व्यापारी खोदाई से पहले ही खेतों का निरीक्षण कर अनुमानित पैदावार के आधार पर सौदा तय कर लेते हैं। तय दिन मजदूरों के साथ पहुंचकर आलू निकलवाते हैं और सीधे उठान कर लेते हैं। किसानों का कहना है कि इससे उन्हें मंडी तक आलू ले जाने की परेशानी से राहत मिल जाती है और मजदूरी, पैकिंग व ढुलाई की व्यवस्था भी व्यापारी ही कर देते हैं। जिन खेतों में साफ और बड़े आकार का आलू निकल रहा है वहां व्यापारी ज्यादा कीमत देने को तैयार हैं। खासकर 3797 और सूर्या किस्म के आलू की मांग अधिक देखी जा रही है, जिससे कई जगह व्यापारियों के बीच प्रतिस्पर्धा भी दिखाई दे रही है।
अगले 8 से 10 दिनों में हो जाएगी अधिकांश खोदाई
पिछले एक सप्ताह से मौसम साफ रहने के कारण खोदाई की गति तेज हुई है। गांवों में सुबह से ट्रैक्टरों और मजदूरों की आवाजाही शुरू हो जाती है और खेतों में खोदाई, छंटाई और पैकिंग का काम एक साथ चल रहा है। किसानों का कहना है कि मौसम अनुकूल रहा तो अगले 8 से 10 दिनों में अधिकांश खेतों से आलू निकल जाएगा
कोल्ड स्टोरेजों में अभी पसरा सन्नाटा
तेज खोदाई के बावजूद इस बार जिले के कई कोल्ड स्टोरेजों में अभी अपेक्षित भीड़ नहीं दिख रही है। पिछले वर्षों में इस समय तक कोल्ड स्टोरेजों के बाहर ट्रैक्टर-ट्रालियों की लंबी कतारें लग जाती थीं, लेकिन इस बार कई स्थानों पर अभी सन्नाटा नजर आ रहा है। कम पैदावार और खेतों से सीधे हो रही बिक्री के कारण शुरुआती दिनों में कोल्ड स्टोरेजों में आलू की आवक कम बताई जा रही है। इससे संचालकों की चिंता भी बढ़ गई है कि इस बार भंडारण क्षमता पूरी तरह भर पाएगी या नहीं।
मजदूरों की बढ़ी मांग
आलू की खोदाई तेज होने के साथ ही खेतों में मजदूरों की मांग भी बढ़ गई है। खोदाई, छंटाई और पैकिंग के लिए बड़ी संख्या में मजदूर लगाए जा रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में मजदूरों की कमी के कारण किसानों को बाहर से मजदूर बुलाने पड़ रहे हैं, जिससे मजदूरी दरों में भी हल्की बढ़ोतरी देखी जा रही है।
गुणवत्ता पर निर्भर कर रहा भाव
व्यापारियों का कहना है कि इस समय आलू का भाव पूरी तरह गुणवत्ता पर निर्भर कर रहा है। साफ और मीडियम साइज के आलू को बेहतर कीमत मिल रही है, जबकि हल्के या मिश्रित साइज के आलू का भाव लगभग 100 रुपये तक कम मिल रहा है। इसी कारण किसान खोदाई के दौरान आलू की अच्छी तरह छंटाई करवा रहे हैं।