कस्बा बिसावर स्थित दघैंटा रजवाह की पटरी पानी के तेज बहाव और ओवरफ्लो होने से तीन दिनों में दूसरी बार फिर से टूट गई। इस बार रजवाहे के पानी ने कई किसानों की दिन रात मेहनत से की गई आलू, सरसों, गेहूं की फसल को अपनी चपेट में ले लिया। किसानों की करीब 300 बीघा फसल पानी में डूब गई। इससे किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया। किसानों ने अपनी डूबी हुई फसल को देखकर अपना माथा पकड़ लिया। उनके चेहरों पर चिंता की लकीरें पड़ गईं।
ग्राम पंचायत बिसावर के मजरा टीकैत के पास शनिवार रात अचानक दघैंटा रजवाहे की पटरी कट गई और पूरी रात रजवाहे का पानी खेतों में भरता रहा। जब सुबह किसान खेतों पर पहुंचे तो खेतों को पानी से भरा देख उनके होश उड़ गए। आनन फानन में वहां काफी किसान एकत्रित हो गए।
फावड़े, बोरों आदि के सहारे कटी पटरी को ठीक कर पानी के बहाव को खेतों की ओर से रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन पानी के तेज बहाव के कारण किसानों की कोशिश नाकाम रही। सूचना देने के काफी समय बाद वहां दोपहर साढ़े 11 बजे सिंचाई विभाग के दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी जेसीबी लेकर पर पहुंचे। पानी को रुकवाकर जेसीबी के माध्यम से पटरी को ठीक किया गया। तब जाकर किसानों ने राहत की सांस ली।
इन किसानों की डूबी फसल
रजवाहे की पटरी कटने से गांव विधिपुर के किसान संजय गौतम की 22 बीघा, टीकैत निवासी मुकेश कुमार की 15 बीघा, पूरन सिंह व सौदान सिंह की 30-30 बीघा, रेव कुमार की 24 बीघा सहित बिजेंद्र सिंह, धाराजीत, राधेश्याम आदि किसानों की करीब 300 बीघा फसलें पानी में डूब गईं। इन किसानों ने प्रशासन से रजवाहे के पानी की वजह से अपनी फसलों में हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे की मांग की।