लखनऊ न्यायालय में हुई जीवा की हत्या की घटना के बाद दीवानी न्यायालय परिसर में शुक्रवार को सतर्कता बढ़ा दी गई। सुरक्षा व्यवस्था में तैनात पुलिसकर्मी शुक्रवार को पहले से अधिक मुस्तैद नजर आए।
उल्लेखनीय है कि जिला न्यायालय परिसर में पूर्व में कई सनसनीखेज घटनाएं हो चुकी हैं। वर्ष 2002 में कचहरी परिसर में अधिवक्ता भूपेंद्र सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वर्ष 2006 में न्यायालय परिसर में बम विस्फोट हुआ था, जिसमें दो लोगों की मृत्यु हुई थी। तीन हमलावरों ने पेशी पर आए दो बंदियों को भी पुलिस कस्टडी में मार दिया था।
बाद में पुलिस ने लोगों के सहयोग से हमलावरों को भी मार गिराया था। न्यायालय परिसर चारों तरफ से खुला है, इसलिए वारदात होने का भय बना रहता है। अधिवक्ता यहां सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए जाने की जरूरत बता रहे हैं। न्यायालय परिसर के द्वारों पर लगे मेटल डिटेक्टर सही कराए जाने की भी जरूरत है। शुक्रवार को दीवानी न्यायालय परिसर में तैनात पुलिसकर्मियों ने सतर्कता दिखाई। पुलिसकर्मी पहले से अधिक मुस्तैद रहे। आने-जाने वाले लोगों की तलाशी लेते हुए नजर आए। संवाद