पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय और नगर पालिकाध्यक्ष आशीष शर्मा के बीच राजनीतिक बर्चस्व की लड़ाई रविवार को सड़कों पर देखी गई। मौका था, ब्राह्मण कुल शिरोमणि महर्षि भगवान परशुराम की शोभायात्रा का।
इस बार शोभायात्रा के आयोजन का जिम्मा सत्ताधारी भाजपा के नगर पालिका अध्यक्ष आशीष शर्मा खेमे से जुड़े लोगों के पास था। लिहाजा इस पर सत्ता की छाप साफ नजर आई। पहली बार शोभायात्रा में अपनी अनदेखी से नाराज पूर्व मंत्री खेमे ने शहर के इतिहास में पहली बार एक ही दिन एक ही वक्त पर दूसरी परशुराम शोभायात्रा निकालकर पुलिस-प्रशासन के लिए चुनौती खड़ी कर दी। हालांकि पिछले 24 घंटे से जिले का प्रशासनिक और पुलिसिया अमला पूर्व मंत्री खेमे से बात करके दूसरी शोभायात्रा को टालने का पूरा प्रयास कर रहा था। बिना परमीशन शोभायात्रा निकालने पर सख्ती बरतने की भी चेतावनी दी गई, लेकिन पूर्व मंत्री ने ऐनवक्त पर बड़ी संख्या में अपने समर्थकों की भीड़ जुटाकर पुलिस-प्रशासन की टेंशन बढ़ा दी। हालांकि शनिवार को जब से पूर्व मंत्री के छोटे भाई जिला पंचायत सदस्य रामेश्वर उपाध्याय ने एक ही वक्त पर दूसरी शोभायात्रा का ऐलान किया, तब से जिले के पुलिस-प्रशासन ने इसे टालने के लिए पूरा जोर लगाया।
रामेश्वर और पूर्व मंत्री के समर्थकों के साथ सदर कोतवाली में शनिवार की देर रात तक कई दौर की बैठकें कीं, लेकिन वह मानने को तैयार नहीं हुए। एसपी ने बिना परमीशन के शोभायात्रा निकालने पर कानूनी कार्रवाई तक की चेतावनी दे दी थी। बावजूद इसके पूर्व मंत्री समर्थकों ने पूरे लाव-लश्कर के साथ शोभायात्रा निकालकर जिले में खूब सुर्खियां बटोरीं।
पूर्व मंत्री व सादाबाद के बसपा विधायक रामवीर उपाध्याय और मथुरा जिले के विधायक व पूर्व मंत्री श्यामसुंदर शर्मा ने पूर्व मंत्री के आगरा रोड स्थित आवास से फीता काटकर शोभायात्रा का शुभारंभ किया। इसके बाद पूर्व मंत्री समर्थकों की भीड़ हाथों में भगवा झंडे लेकर और भगवान परशुराम की जय का उद्घोष करते हुए आगे बढ़ी तो पुलिस और प्रशासनिक अफसरों की सांसें अटक गईं, क्योंकि इसी रोड पर चंद कदम की दूरी पर ब्राह्मण महासभा के बैनर तले नगर पालिकाध्यक्ष आशीष शर्मा की अगुवाई में शोभायात्रा का शुभारंभ हो रहा था। ऐसे में दोनों खेमों के बीच टकराव की आशंका ने अधिकारियों के हाथ-पांव फुला दिए।
आनन-फानन अधिकारियों को पीएसी और आरआरएफ तक बुलवानी पड़ी। पूरे आगरा रोड इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया। इससे पूर्व अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. अरविंद कुमार, एसडीएम सदर अरुण कुमार सिंह, सीओ सादाबाद योगेश कुमार, सीओ सिटी सुमन कनौजिया, सदर कोतवाल जसपाल पंवार, हाथरस गेट कोतवाल एके सिंह समेत अन्य अधिकारियों ने दूसरी शोभायात्रा नहीं निकालने के लिए पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय और उनके समर्थकों को समझाने के भरपूर प्रयास किए। उन्हें संभावित टकराव को टालने के लिए कई विकल्प भी बताए गए, लेकिन वह शोभायात्रा को निकालने पर अड़े रहे। पूर्व मंत्री समर्थकों के कड़े तेवरों को देखते हुए अधिकारियों ने आगरा रोड पर पूर्व मंत्री के आसपास काफी फोर्स तैनात करके कड़ा सुरक्षा घेरा बना दिया और चेतावनी दी कि अगर किसी ने यहां से आगे बढ़ने की कोशिश की तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों की पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय, उनके भाई व पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विनोद उपाध्याय, जिला पंचायत सदस्य रामेश्वर उपाध्याय समेत अन्य नेताओं से तीखी नोक-झोंक भी हुई, जिससे वहां अच्छा-खासा हंगामा खड़ा हो गया। एकबारगी तो स्थित पूर्व मंत्री समर्थकों और अधिकारियों के बीच टकराव की बन गई, लेकिन मौके की नजाकत को देखते हुए अधिकारियों ने तेवर नरम किए और पूर्व मंत्री के कारवां को इस शर्त के साथ आगे बढ़ने की इजाजत दे दी गई कि वह न तो मुख्य शोभायात्रा में शामिल होंगे और न हीं उस रूट से जाएंगे, जिस रूट से मुख्य शोभायात्रा निकलेगी। दोनों शोभायात्राओं के साथ बड़ी संख्या में फोर्स लगा दिया गया और फोर्स के साथ दोनों शोभायात्राएं आगे बढ़ीं। सादाबाद गेट चौराहे पर प्रशासन ने मुख्य शोभायात्रा को चूना वाला डंडा होकर निर्धारित रूट से निकाला गया, जबकि इसे निकालने के बाद पूर्व मंत्री खेमे की शोभायात्रा को लोहट बाजार से कमला बाजार, सरक्यूलर रोड होते हुए गोशाला रोड स्थित अटल टाल बगीची तक पहुंचाया गया। पूर्व मंत्री की शोभायात्रा को प्रशासन ने शाम पांच बजे तक ही समाप्त करा दिया। इसके साथ ही शक्ति प्रदर्शन का यह सियासी ड्रामा खत्म हो गया।
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दो शोभायात्राओं को लेकर हर जुबां पर रहे सवाल
हाथरस। शहर में हर जुबां पर परशुराम शोभायात्रा के मौके पर हुए घटनाक्रम की चर्चा रही। हर कोई जानकारों और मीडिया कर्मियों से यही पूछता रहा कि किसकी शोभायात्रा निकल रही है। क्यों दोनाें शोभायात्राएं निकलेंगी या फिर इस टकराव का कोई हल निकला है। शाम को जब दूसरी शोभायात्रा शुरू हो गई और खत्म हो गई। तब जाकर चर्चाओं का यह दौर थमा।
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पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय की तरफ से शोभायात्रा निकालने की परमीशन ली गई है या नहीं ली गई है, यह जांच का विषय है। दिन भर में हमें 40 से 50 परमीशन जारी करनी पड़ती हैं। लिहाजा दफ्तर में फाइल देखी जाएगी कि इनके द्वारा परमीशन के लिए कोई आवेदन किया गया है या नहीं।
- अरुण कुमार सिंह, एसडीएम सदर