शहर की घनी आबादी वाली हनुमान गली से 57 क्विंटल सिक्के बरामद होने के सनसनीखेज मामले में एफआईआर दर्ज करने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इतनी भारी मात्रा में रेजगारी आखिर कहां से लाई गई थी और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। कारण है कि हर महीने बाजार से इतनी बड़ी मात्रा में रेजगारी एकत्रित करना संभव नहीं।
जांच एजेंसियों को इस बात की प्रबल आशंका है कि इन सिक्कों का इस्तेमाल अवैध रूप से बाजार में चलाने के बजाय इनमें प्रयुक्त होने वाली बहुमूल्य धातु को निकालने के लिए किया जा रहा था। जानकारों का मानना है कि पांच रुपये के पुराने या मिश्रित धातु वाले सिक्कों को गलाकर सिल्लियों में बदला जा रहा था, जिनकी बाजार में और अवैध औद्योगिक गतिविधियों में काफी मांग होती है।
पांच रुपये का मेटल मूल्य 10 रुपये के करीब पड़ता है। एफआईआर में आरोपी नवीन समाधिया से पुलिस पूछताछ करेगी, जिसमें अहम खुलासे होंगे। इस कारोबार में नवीन के अलावा अन्य लोगों के भी शामिल होने की जानकारी सामने आई है। संभावना है कि इन लोगों ने भी सिक्के छिपा रखे हों।
शहर में गलाई भट्ठियों वाले हुए भूमिगत
इस खुलासे के बाद से शहर में अवैध रूप से धातुओं की गलाई का काम करने वाले लोग भूमिगत हो गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, मुख्य रूप से ढकपुरा क्षेत्र में इस तरह की गलाई फैक्टरियां और भट्ठियां संचालित होती हैं। पुलिस अब शहर के ऐसे संदिग्ध ठिकानों और फैक्टरियों की फेहरिस्त तैयार कर रही है, जहां सिक्कों को गलाने का काम किया जा सकता था।
विवेचना से पहले कुछ नहीं कहा जा सकता है। आरोपी से पूछताछ व विस्तृत जांच के बाद ही तथ्य सामने आएंगे। एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
-हिमांशु माथुर, सीओ सिटी