वृहद पौधरोपण अभियान के तहत 24 विभागों द्वारा रोपे गए पौधे दो दिन बाद ही बेजान हो गए हैं। कुछ सूख गए तो कुछ उखड़ गए और अब वहां गड्ढे ही बचे हैं। ऐसे हालात में कितने पौधे पनप पाएंगे, यह सवाल खड़ा हो रहा है।
जिले में नौ जुलाई को 22.82 लाख पौधे रोपे गए। इनमें 17.82 लाख पौधे 24 विभागों और पांच लाख पौधे वन विभाग ने रोपे थे। जिले में मुख्य आयोजन पुलिस लाइन में किया गया था। यहां सांसद अनूप प्रधान, विधायक अंजुला माहौर के अलावा मुख्य अतिथि लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष राकेश गर्ग मुख्य अतिथि थे। दो दिन बाद शुक्रवार को इसकी पड़ताल की तो गड्ढे ही यहां दिख रहे थे, पौधे या तो सूख गए थे। पत्ते झड़ गए थे। सहपऊ के गांव गुतहरा में रोपे गए पौधों सूख गए, केवल डंडी ही उनकी नजर आ रही है। सासनी से इगलास रोड पर भी यही हाल हुआ है। इस हाल को देखकर नहीं लगता कि पौधे फिर से हरे हो पाएंगे।
पुलिस लाइन में लगा है पौधों का ढेर
जिले में 22.82 लाख पौधे रोपकर जिले का लक्ष्य शत-प्रतिशत हासिल करने का दावा किया गया है। इनकी जीओ टैगिंग भी हो गई है। लेकिन पुलिस लाइन में मैदान के एक किनारे पर ऐसे पौधे पड़े नजर आए, जिन्हें अभी रोपा नहीं गया था।
बिना खाद लगाए रोप दी गई पौध
वृहद पौधरोपण के लिए वन विभाग अपनी नर्सरी में पौध तैयार कराता है। वानकी तकनीक का प्रयोग करता है। जबकि अन्य विभाग ऐसा नहीं करते। पौधरोपण से एक दिन पहले गड्ढा खोदकर उसमें जैविक खाद डाली जानी चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं किया जाता। खाद तो डाली ही नहीं जाती, जिसकी वजह से अधिकांश पौधे सूख जाते हैं।
-वन विभाग व अन्य विभागों के पौधरोपण में अंतर होता है। अन्य विभागों को रोपण का तकनीकी ज्ञान नहीं होता। वैसे भी हर पौध रोपे जाने के बाद एक झटका लेती है, उसके बार वह सही हो जाती है। -राकेश चन्द्र यादव, प्रभागीय वनाधिकारी, हाथरस