हाथरस। संरक्षित स्मारक मंदिर श्रीदाऊजी महाराज और किला राजा दयाराम क्षेत्र के संरक्षण में प्रशासन की ढिलाई पर उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग और डीएम हाथरस से पूछा है कि उन्होंने इन स्मारकों के संरक्षण और रखरखाव के लिए अब तक क्या किया है।
गौरतलब है कि संरक्षित स्मारकों की हिफाजत के लिए काम कर रही संस्था सामाजिक धरोहर कल्याण समिति के अध्यक्ष हरीश कुमार शर्मा एडवोकेट ने इस संबंध में उच्च न्यायालय में जनहित याचिका पेश की थी। इसमें कहा गया था कि ऐतिहासिक मंदिर और किला क्षेत्र में कानून का उल्लंघन करके राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक उदासीनता से नित नए अतिक्रमण हे रहे रहे हैं। प्रशासनिक और पुरातत्व विभाग के अधिकारी एक-दूसरे पर टालमटोल करके अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं कर रहे हैं। याचिका की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूण और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के समक्ष हुई। याचियों के अधिवक्ता बीवी राय और संजय कुमार दुबे ने पीठ के सामने इस मामले में सारे तथ्य पेश किए। न्याय पीठ ने शासन के स्थायी अधिवक्ता को निर्देश दिया कि वह पुरातत्व विभाग और डीएम हाथरस दोनों से अलग-अलग विस्तार से जानकारी प्राप्त करके बताएं कि उन्होंने संरक्षित स्मारक के संरक्षण और रखरखाव के लिए क्या काम किए हैं। इस मामले में 26 फरवरी को न्यायालय दोबारा सुनवाई की तारीख तय की है। जनता की ओर से बंगाली प्रसाद शर्मा, सतीशचंद्र उपाध्याय, डॉ. कैलाशबिहारी गौड़, बनी सिंह राना, डॉ.बीपी वशिष्ठ, रामगोपाल दीक्षित आदि ने याचिका दाखिल की।