ठेकेदार को पेजयल आपूर्ति के इस काम का भुगतान तीन बार में किया गया। पहला बिल नवंबर 2023 में 12.01 लाख रुपये का पास हुआ। इसके बाद जून 2024 में 17.61 लाख रुपये तथा अंतिम भुगतान सितंबर 2024 में 10.51 लाख रुपये का किया गया। इस तरह से इस प्रोजेक्ट पर कुल 39.68 लाख रुपये का भुगतान किया गया। इसके अलावा अन्य खर्च मिलाकर कुल 40.13 लाख रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन नगला भीम के लोगों तक पानी नहीं पहुंचा।
न पाइपलाइन न डाली, न कनेक्शन हुए
योजना के अंतर्गत नगला भीम की गलियों में एचडीपीई पाइपलाइन डाली जानी थी। इस पाइपलाइन से प्रत्येक घर को कनेक्शन भी देने थे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। नगला भीम के लोगों को पता ही नहीं कि ऐसी कोई कार्ययोजना भी बनी और उसका भुगतान भी हो गया। ठेकेदार ने कागजों में 233 कनेक्शन दर्शाकर उसका भुगतान प्राप्त किया।
3.94 करोड़ के कामों में फर्जी एफडीआर का आरोप
छह महीने पहले प्रकाश में आए नगर पालिका परिषद के फर्जी एफडीआर प्रकरण में इन 12 कामों की जांच नहीं हुई थी। एफडीआर मामले के शिकायतकर्ता प्रशांत कौशिक का आरोप है कि राज्य सेक्टर पेयजल योजना के इन कार्यों की फाइलों को छिपा लिया गया था, यदि इन 12 कामों की जांच की जाए तो इनमें भी फर्जी एफडीआर मिलेंगी। यही नहीं इन कामों का भौतिक सत्यापन कराया जाए तो और भी बड़ा भ्रष्टाचार उजागर हो सकता है।