जिलाधिकारी को बृज क्षेत्र के लक्खी मेला श्रीदाऊजी महाराज का रिसीवर नियुक्त किए जाने संबंधी सिविल जज सीनियर डिवीजन के निर्णय को चुनौती दी गई है। इस संबंध में डिस्ट्रिक्ट बार के अधिवक्ता अतुल आंधीवाल एवं अजय भारद्वाज ने सत्र न्यायालय में अपील की है।
अधिवक्ताओं का तर्क है कि जिला मजिस्ट्रेट को सिर्फ उसी संपत्ति का रिसीवर बनाया जा सकता है, जिससे कोई राजस्व प्राप्त होता हो। जिस संपत्ति से राजस्व प्राप्त नहीं होता, उसका रिसीवर जिला मजिस्ट्रेट को बनाया जाना सिविल न्याय प्रक्रिया संहिता का उल्लंघन है। इस तर्क को गंभीरता से लेते हुए अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय एसएन त्रिपाठी के न्यायालय ने अपील स्वीकार कर ली है। इस मामले में आज सुबह 11 बजे सुनवाई होगी। अधिवक्ताओं ने न्यायालय में दाखिल की गई अपील में जनभावनाओं से जुड़े मुद्दों को उठाया है। इन अधिवक्ताओं का कहना है कि मेला हाथरस की जनता का है। इसका लगातार राजनीतिकरण किया जा रहा है। प्रदेश में जिस दल की भी सरकार बन जाती है, उसी दल विशेष के लोगों द्वारा जिला प्रशासन के माध्यम से मेला की सभी गतिविधियों पर अपना कब्जा कर लिया जाता है।
अधिवक्ताओं ने यह भी दावा किया है कि जिला मजिस्ट्रेट मेला के रिसीवर होते हुए भी इस क्षेत्र की सुरक्षा करने में पूरी तरह असफल हैं। अब तक 400 लोगों के अतिक्रमण चिह्नित होने के बावजूद इनका ध्वस्तीकरण नहीं किया जा रहा है। इससे मेला क्षेत्र की सुंदरता खत्म हो रही है। मेला रिसीवर द्वारा मेले के ठेके से मिलने वाले पैसे का न्यायालय को हिसाब दिए जाने का प्रावधान है, लेकिन पिछले कई वर्षों से कोई हिसाब नहीं दिया जाता है। मंदिर श्रीदाऊजी महाराज के लिए जमा 20 प्रतिशत राशि को सिर्फ मंदिर के विकास पर खर्च किया जा सकता है। अन्य किसी कार्य के लिए इसमें से धनराशि आवंटित नहीं की जा सकती। लंबे समय से मेला के लिए मिलने वाले दान और चंदे का कोई भी कार्यक्रम संयोजक हिसाब नहीं दे रहा है, जिससे इसमें बड़े पैमाने पर पैसे के दुरुपयोग की संभावना है। मेले के लिए मिलने वाले दान और चंदे का हिसाब न्यायालय को मिलना चाहिए।
एडीजे द्वितीय एसएन त्रिपाठी ने इस मुद्दे पर सिविल न्याय प्रक्रिया संहिता के अधिवक्ता बीएस टालीवाल, राकेश बल्लभ वशिष्ठ, एससी टालीवाल और अजय कुलश्रेष्ठ के साथ डीडीसी एवं एडीजीसी शरद कुमार, प्रमोद कुमार गुप्ता और प्रमोद शर्मा आदि विद्वान अधिवक्ताओं को सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों सहित बुधवार को सुबह 11 बजे से न्यायालय की सुनवाई में विधिक पक्ष रखने के लिए आमंत्रित किया है।