संसाधनों के अभाव में सरकारी अस्पताल रेफर सेंटर बने हुए हैं। हाथरस शहर के निजी अस्पतालों में भी मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। निजी अस्पताल व नर्सिंग होम रात में बंद रहते हैं। इस स्थिति में मरीजों को आगरा-अलीगढ़ के लिए दौड़ लगानी पड़ती है। मेडिकल कॉलेज की घोषणा भी केवल कागजों में दौड़ रही है।
हाथरस जिला स्वास्थ्य सेवाओं में काफी पिछड़ा हुआ है। जिला अस्पताल में 25 चिकित्सकों के सापेक्ष 12 चिकित्सक तैनात हैं। शल्य चिकित्सक तक नहीं है। वेंटीलेटर धूल फांक रहे हैं, 24 घंटे एक्सरे की सुविधा केवल दिखावा रह गई है। आकस्मिक स्थिति में मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद आगरा-अलीगढ़ रेफर कर दिया जाता है। इधर, निजी अस्पतालों में भी इंतजामों की व्यवस्था केवल बाहरी दिखावा है। मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी रात के समय होती है। रात के समय जिले में काई भी निजी अस्पताल खुला नहीं रहता है। मरीजों को उपचार नहीं मिल पाता।
जिले में मेडिकल कॉलेज मंजूर हो गया है, लेकिन जिला प्रशासन को अभी तक इसके लिए जगह नहीं मिल पाई है। भूमि के लिए कवायद नाकाफी साबित हो रही है। जिलाधिकारी की तरफ से पराग डेयरी की भूमि को सशुल्क कराए जाने के लिए पांच बार संयुक्त सचिव चिकित्सा शिक्षा अनुभाग को भेजा चुका है। अभी तक इस पत्र पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है।
केस-1
पांच जुलाई को मुरसान गेट पर माहौर गेस्ट हाउस के निकट बाइक सवार दो नकाबपोश हमलावरों ने दुकान पर बैठे मिस्त्री को गोली मार दी थी। उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल लाया गया था। जहां से उसे गंभीर हालत में हायर मेडिकल सेंटर रेफर कर दिया गया। उपचार के लिए ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया था।
केस -2
19 दिसंबर 2023 को हाथरस जंक्शन क्षेत्र के कस्बा मेंडू निवासी रवि पुत्र रामबाबू सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था। उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया था। यहां से प्राथमिक उपचार के बाद उसे अलीगढ़ रेफर कर दिया गया था। अलीगढ़ ले जाते वक्त रास्ते में उसने दम तोड़ दिया था।
मेडिकल कॉलेज के लिए पत्राचार किया जा रहा है। भूमि निर्धारित होते ही निर्माण शुरू हो जाएगा। फिलहाल मंडलायुक्त को भी पत्र भेजा गया है। -अर्चना वर्मा, जिलाधिकारी।