लोकतंत्र सेनानी अपनी मांगों को लेकर एडीएम को ज्ञापन देते हुए।
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हाथरस। जिला प्रशासन के जरिए 42 लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को उनकी पेंशन संबंधी पत्रावली कार्यालय में उपलब्ध नहीं होने संबंधी नोटिस दिया गया है। नोटिस के बाद लोकतंत्र रक्षक सेनानियों में खलबली मच गई है। इस क्रम में बुधवार को उत्तर प्रदेश लोकतंत्र रक्षक सेनानी कल्याण समिति के बैनर तले एक ज्ञापन मुख्य सचिव के नाम एडीएम डॉ. अशोक कुमार शुक्ला को सौंपा गया। ज्ञापन में न्याय सहायक पर आरोप लगाते हुए नोटिस वापस किए जाने की मांग की गई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि शासनादेश के तहत जिले के 96 लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को सम्मान राशि एवं अन्य सुविधाएं 2006 से लगातार दी जा रही हैं। विगत नवंबर 2016 में शासन स्तर से प्रत्येक डीएम को अपने जिले में आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्तियों को लोकतंत्र रक्षक सेनानियों की सम्मान राशि और सुविधा की पात्रता की पुन: जांच किए जाने के आदेश दिए गए थे। इस क्रम में यहां 54 लोकतंत्र सेनानियों को आपराधिक प्रवृत्ति मानते हुए अक्तूबर 2019 से सम्मान राशि पर रोक लगा दी गई।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि वर्तमान में 42 लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को सम्मान राशि दी जा रही है, लेकिन न्याय सहायक द्वारा संबंधित उच्चाधिकारियों को गुमराह कर 42 लोकतंत्र रक्षक सेनानियों के विरुद्ध सम्मान राशि से संबंधित पत्रावली और प्रपत्र कार्यालय में नहीं होना बताते हुए नोटिस जारी किया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि 42 लोकतंत्र रक्षक सेनानियों के प्रपत्र नहीं होने का नोटिस देकर सेनानियों का अपमान करते हुए परेशान किया जा रहा है। लोकतंत्र रक्षक सेनानी मोटी रकम रिश्वत में देने को मजबूर हैं। लोकतंत्र सेनानियों ने न्याय सहायक के विरुद्ध जांच कराकर नोटिसों को वापस लिए जाने की मांग की है। इस मौके पर कृष्ण गोपाल शर्मा, चिंरजीलाल, राम निवास रावत, मुन्नी देवी, राजन सिंह, विद्या देवी आदि मौजूद थीं।