शहर की डाकखाने वाली गली की निवासी अर्चना शर्मा दिव्यांग बच्चों के जीवन में नई उम्मीद जगा रही हैं। वह आवासीय दिव्यांग विद्यालय से जुड़कर मूक-बधिर बच्चों को न सिर्फ निशुल्क शिक्षा प्रदान कर रही हैं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयासरत हैं।
अर्चना शर्मा ने डिप्लोमा इन एजुकेशन करने के बाद विशेष बच्चों की शिक्षा को अपना उद्देश्य बना लिया। वह बच्चों को न केवल पढ़ाती हैं, बल्कि उन्हें जीवन के जरूरी कौशल भी सिखाती हैं, ताकि वे समाज में आगे बढ़ सकें। बताती हैं कि उनके पति दीपक शर्मा पहले से ही समाजसेवा से जुड़े हैं। उनकी प्रेरणा से ही उन्होंने भी इस क्षेत्र में काम करने का निर्णय लिया। आज वह मूक-बधिर बच्चों की सेवा कर रही हैं।
वह कहती हैं कि दिव्यांग बच्चों को केवल शिक्षा देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाना भी बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से वह उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण देती हैं, ताकि वे अपने पैरों पर खड़े हो सकें। इन बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि अर्चना के प्रयासों से उनके बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे पहले से अधिक सक्रिय हो गए हैं। वह न केवल शिक्षा का दीप जला रही हैं, बल्कि दिव्यांग बच्चों के जीवन को संवारने में भी अहम भूमिका निभा रही हैं।