जिला अस्पताल में चिकित्सकों की कमी मरीजों के लिए परेशानी का सबब बन रही है। गिने-चुने चिकित्सक होने के कारण ओपीडी के दौरान अधिकतर कक्ष खाली रहते हैं। बुधवार को यहां 1343 मरीज पहुंचे। इनमें से कई मरीज फिजीशियन डॉक्टर से परामर्श लेने के लिए भटकते नजर आए। अवकाश के कारण कई चिकित्सक उपस्थित नहीं थे।
ठंड बढ़ने के साथ ही लोग सर्दी-जुकाम और सांस की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। रोजाना इन बीमारियों के सैकड़ों मरीज जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। सिकंदराराऊ, हसायन, सहपऊ, सासनी आदि जगहों से भी मरीज यहां पहुंचते हैं। बुधवार को यहां सर्दी बुखार व छाती में संक्रमण से संबंधित 357 मरीज पहुंचे। फिजीशियन डाॅ. अवधेश कुमार अवकाश पर हैं। बुधवार को फिजीशियन डाॅ. वरुण चौधरी भी ड्यूटी के चलते बाहर थे। ऐसे में कोई फिजीशियन न होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। यहां त्वचा के 167 व सांस संबंधी 222 मरीज पहुंचे। 112 बच्चों को भी परीक्षण किया गया, जिनमें अधिकतर सर्दी-जुकाम की चपेट में थे।
सर्दी-जुखाम और बुखार है। इसलिए बारह नंबर कक्ष में परामर्श लेने के लिए बोला था, लेकिन यहां चिकित्सक नहीं है। इसलिए दूसरे चिकित्सक को दिखाया है।
-बनी सिंह, नाई का नगला।
मंगलवार को जिस चिकित्सक को दिखाया था, वे बुधवार को नहीं बैठे हैं। एलर्जी हो गई है। फायदा न होने पर दोबारा परामर्श लेने आई थी। अब वापस जाना पड़ेगा।
-राजनश्री, नगला सिंह सासनी।
हाथ-पैर सुन्न हो जाते हैं। चलने-फिरने में भी दिक्कत होती है। सीएचसी पर लाभ नहीं मिला। पर्चा बनाने वाले ने फिजीशियन को दिखाने को कहा, लेकिन यहां चिकित्सक ही नहीं हैं।
सर्वेश, सिकंदराराऊ।
जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। इसके लिए उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। चिकित्सक के अवकाश पर होने या ड्यूटी पर बाहर होने पर मेडिकल ऑफिसर की ड्यूटी लगाई जाती है, जो परीक्षण करने में संभव हैं। भीड़ के कारण मरीजों को इंतजार करना पड़ता है, जिससे उन्हें परेशानी होती है।
डाॅ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस जिला अस्पताल।