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पेंट की महंगाई से पुताई करने वालों का उड़ा रंग

सार

संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।दिवाली की रंगाई पुताई के सामान पर महंगाई का साया है।कारोबारी विदेशों से आने वाले क्लयूड ऑयल के महंगा होने के चलते रेट बढ़ने की बात कह रहे हैं।इस कारण लोगों की जेब पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
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एक दुकान पर बिक्री के लिए रखा पेंट। संवाद - फोटो : HATHRAS
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विस्तार
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
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दिवाली की रंगाई पुताई के सामान पर महंगाई का साया है। पेंट के दामों में बीते साल की अपेक्षा इस साल 25 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इस कारण ग्राहकों की जेब पर बोझ बढ़ गया है। कारोबारी विदेशों से आने वाले क्लयूड ऑयल के महंगा होने के चलते रेट बढ़ने की बात कह रहे हैं। इस बार कोरोना नहीं है। इस लिए कारोबारियों ने मॉल का स्टॉक भी कर लिया, लेकिन बाजार में उछाल न आने के कारण कारोबार सुस्त है।
उल्लेखनीय है कि हाथरस जिले में हर साल जिले में पचास से साठ करोड़ के पेंट का कारोबार होता है। बीते दो साल से कोरोना के चलते लोगों के पास पैसे की कमी थी। इस बार कोरोना नहीं है। इसलिए लोग घरों व प्रतिष्ठानों की रंगाई पुताई कराने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं पेंट के बढ़े दाम आग में घी डालने का काम कर रहे हैं। इस साल रेगमाल से लेकर चूना तक के दामों में इजाफा हो गया है। इस कारण लोगों की जेब पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। पुताई कराने में लोगों के पसीने छूट रहे हैं।
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पेंट के दाम प्रतिकिलो
इमर्सन 140 से 165 रुपये, इनेबल 230 से 280 रुपये, डिस्टेंबर 60 से 80 रुपये, प्राइमर 140 से 160 रुपये, कार्पिन तेल 60 रुपये से 90 रुपये की सात सौ एमएल की बोतल। प्लास्टिक पेंट 450-550 रुपये। रेगमाल दस से पंद्रह रुपये। ब्रुश 80 से 120 रुपये, पुट्टी 22 रुपये से 24 रुपये। स्प्रे 100 रुपये से 120 रुपये, सफेद चूना सात रुपये प्रतिकिलो से दस रुपये प्रतिकिलो पर पहुंच गया है। इसके अलावा अन्य सामान के रेटों में भी इस साल इजाफा हुआ है।
- पेंट बनाने में क्लयूड ऑयल का इस्तेमाल होता है। जोकि आस्ट्रेलिया, अमेरिका, इंग्लैड से आता है। इस बार क्लयूड ऑयल महंगा आ रहा है। इस कारण पेंट के दामों में 25 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। इस बार कारोबार भी सुस्त है। - गौरव वार्ष्णेय, पेंट कारोबारी।
- दो साल कोरोना के चलते पुताई नहीं कराई थी। इस बार पुताई कराने में पसीने छूट रहे हैं। क्योंकि पेंट के अलावा अन्य सामान भी महंगा है। जो चीज दस रुपये की आती थी अब पंद्रह रुपये की आ रही है। इस कारण रंगाई पुताई भी महंगाई से नहीं बच पा रही है। - नरेंद्र अग्निहोत्री, ग्राहक
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- आटा तीस रुपये किलो हो गया है। महंगाई भी दिन पर दिन बढ़ गई है। इस कारण पुताई का काम करने के इस साल सौ रुपये का इजाफा हुआ है। इन दिनों महंगाई के हिसाब से पांच सौ रुपये रोजाना भी कम है। खानेपीने की वस्तुएं सस्ती हो तो राहत मिले। - पप्पू, पुताई श्रमिक।
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