एक तरफ गर्मी के मौसम में पानी के लिए मारामारी मची है, वहीं दूसरी तरफ जिले के ग्रामीण अंचल में शुद्ध पानी की सप्लाई के लिए बनीं 60 पेयजल योजनाएं प्यासे लोगों को मुंह चिढ़ा रही हैं। यह पेयजल योजनाएं जल निगम के रिकॉर्ड में तो संचालित हैं, लेकिन सच यह है कि आधा दर्जन से ज्यादा पेयजल योजनाएं तो बनने के बाद आज तक कभी चली ही नहीं।
भीषण गर्मी में जिला प्रशासन जिले के आम लोगों की प्यास बुझाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। पूर्व में जिला प्रशासन गर्मी के मौसम में सभी ग्राम पंचायतों के तालाब-पोखरों में पानी भरवाकर जिले के बाशिंदों के अलावा पशु-पक्षियों को पीने के लिए पानी उपलब्ध कराने के प्रयास करता था, लेकिन इस बार इस दिशा में कोई कदम ही नहीं उठाए गए हैं, जिससे इस गर्मी के सीजन में भी जिले के बाशिंदे पानी के लिए त्राहि-त्राहि करने को मजबूर हो रहे हैं। एक तरफ तो जिले में 5,800 हैंडपंप ठप पड़े हैं।
जल निगम के रिकॉर्ड में वैसे तो 60 पाइप पेयजल योजनाएं हैं। जो सभी संचालित हैं, लेकिन शहर की सदर तहसील और गढ़ी तमना में पीने के पानी की सप्लाई के लिए बनी पाइप पेयजल योजनाएं बनने के बाद से ही संचालित नहीं हैं। हाथरस ब्लॉक के गांव परसारा में बनी पाइप पेयजल योजना निर्माण के बाद से कभी पानी नहीं दे सकी।
सादाबाद के गांव कुरसंडा में बनी पाइप पेयजल योजना अपने निर्माण के बाद से कभी पानी सप्लाई नहीं कर सकी, लेकिन विभाग के रिकॉर्ड में यह सभी पाइप पेयजल योजनाएं पानी दे रही हैं, जबकि हाजीपुर, शेखपुरा, महौ आदि पेयजल योजनाएं ऐसी हैं, जो अपने निर्धारित क्षेत्र में तो कभी पानी की सप्लाई कर ही नहीं पाती।
परसारा की पाइप पेयजल योजना का संचालन हुआ हैं। ग्रामीण और ग्राम प्रधान ने शिकायत की है तो उसकी जांच कराई जाएगी। जबकि गढ़ी तमना की पाइप पेयजल योजना ग्राम पंचायत के अधीन है। इसके संचालन का जिम्मा ग्राम पंचायत का है। अन्य पेयजल योजनाओं की जहां भी शिकायत मिलती है, वहां उसकी जांच कराकर विधिवत रूप से संचालन किया जा रहा है।
बीके शर्मा, एक्सईएन जल निगम