इसके बाद ग्रामीण पुरानी ठेके की दुकान पर पहुंच गए और हंगामा करने लगे। पुलिस वहां भी पहुंच गई। काफी देर तक ग्रामीणों की पुलिस से नोकझोंक हुई। ग्रामीणों का कहना था कि जिस स्थान पर आजकल देसी शराब का ठेका है, उसके नजदीक ही एक मंदिर है। इस मंदिर पर गांव की महिलाएं रोज पूजा करने आती हैं। यह असामाजिक तत्व शराब पीकर गाली-गलौज करते हैं और महिलाओं पर फब्तियां कसते हैं।
गांव में शराब ठेका नहीं खुलना चाहिए।
आबकारी निरीक्षक और नए ठेकादार ने वहां पर अन्य स्थान की तलाश की, लेकिन बात नहीं बनी। काफी देर बाद भी जब ग्रामीण नहीं माने तो पुलिस ने वहां बल प्रयोग शुरू कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने बेवजह मारपीट की है। मारपीट में कई ग्रामीणों के चोट भी आई है। वह बुधवार को डीएम कार्यालय पर जाकर ज्ञापन देंगे और पुलिस द्वारा की गई अभद्रता की शिकायत करेंगे।
गांव में पिछले करीब 22 साल से लगातार देसी शराब का ठेका चल रहा है। जिस स्थान पर देसी शराब की दुकान खुली हुई है, अब ग्रामीण उसी स्थान पर दुकान खोलने का विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों से वार्ता की जाएगी। पुलिस ने कोई लाठीचार्ज अथवा मारपीट नहीं की है।-मनीष चौधरी, एसडीएम सादाबाद