जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल-बेहाल है। शुक्रवार को जिला अस्पताल की ओपीडी महज तीन चिकित्सकों के हवाले रही। इससे मरीजों को उपचार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। घंटों इंतजार के बाद मरीजों को उपचार मिल सका। शुक्रवार को ओपीडी में करीब 1500 मरीज आए।
जिले का स्वास्थ्य विभाग चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल बागला जिला अस्पताल का भी हाल-बेहाल है। यहां चिकित्सकों के 25 पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष अस्पताल में महज 12 चिकित्सक तैनात हैं। शुक्रवार जिला अस्पताल की ओपीडी में महज तीन चिकित्सक ही मौजूद रहे। इससे चिकित्सक कक्षों के सामने मरीजों की लंबी-लंबी कतार लग गईं। मरीजों को उपचार के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। वहीं ओपीडी में विशेषज्ञ चिकित्सक न बैठने से कई मरीज तो बिना उपचार के ही वापस लौट गए।
पत्नी को बुखार आ रहा है। उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल लेकर आया हूं। डेढ़ घंटे से अधिक समय से कतार में इंतजार कर रहा हूं। अभी तक नंबर नहीं आया है।
-फीरोज, नगला गोपी, तीमारदार
बच्चे को एलर्जी है। उपचार के लिए जिला अस्पताल लेकर आया हूं। यहां चिकित्सकों की कमी है। दो घंटे से इंतजार कर रही हूं। अभी दवा नहीं मिल सकी है।
-रामवती, नवीपुर खुर्द, तीमारदार।
ओपीडी में तीन नहीं पांच चिकित्सक बैठे थे। हो सकता है वार्ड में राउंड पर चले गए हों। अस्पताल में चिकित्सकों की तो कमी है ही। ओपीडी के चिकित्सकों पर ही इमरजेंसी व पोस्टमार्टम की जिम्मेदारी रहती है। हमारी कोशिश है कि सीमित संसाधनों में मरीजों को समुचित इलाज मुहैया कराया जा सके।
- डॉ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस, बागला जिला अस्पताल हाथरस।