एक स्टेशन-एक उत्पाद योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य प्रत्येक स्टेशन को किसी एक स्थानीय उत्पाद से जोड़ना और स्थानीय उद्योगों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना था। हालांकि हाथरस जिले में फिलहाल यह योजना कागजों तक ही सीमित रह गई है।
रेलवे की महत्वाकांक्षी योजना एक स्टेशन-एक उत्पाद हाथरस जिले में कारगर साबित नहीं हुई। योजना के तहत यात्रियों को स्थानीय उत्पादों से रूबरू कराने के लिए हाथरस सिटी और हाथरस जंक्शन रेलवे स्टेशनों पर हींग के स्टॉल लगाए गए थे, लेकिन अपेक्षित रुझान नहीं मिलने से ये दोनों स्टॉल बंद पड़े हैं।
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वित्तीय वर्ष 2022-23 यात्रियों को हाथरस की पहचान हींग से परिचित कराने के लिए रेलवे ने दोनों स्टेशनों पर स्टॉल लगवाए थे, लेकिन अब हालात यह हैं कि सिटी स्टेशन का स्टॉल पिछले एक साल से बंद पड़ा है, जबकि हाथरस जंक्शन स्टेशन पर भी एक महीने से बिक्री पूरी तरह ठप है। इन स्टॉल के ठेके के लिए किसी भी कारोबारी ने आवेदन नहीं किया।
योजना के तहत 15 दिन से लेकर दो माह की अवधि तक के लिए ठेका दिया जा सकता है, ताकि छोटे उद्यमी भी इसमें भाग ले सकें, लेकिन शायद कम अवधि के ठेके और यात्रियों की सीमित खरीद के चलते किसी को यह योजना लाभदायक नहीं लग रही। माना जा रहा है कि किराया और रखरखाव का खर्च अधिक पड़ता है। इस कारण कारोबारी ठेका लेने में रुचि नहीं दिखा रहे। उत्तर मध्य रेलवे प्रयागराज के पीआरओ अमित कुमार सिंह ने बताया कि जो नियम हैं, वह स्थानीय स्तर पर नहीं बनते। बोर्ड से यह नियम तैयार होते हैं, फिर भी समस्या का ब्योरा लेकर कुछ कारगर उपाय किए जा सकते हैं।
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कागजों तक सीमित रह गई योजना
एक स्टेशन-एक उत्पाद योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य प्रत्येक स्टेशन को किसी एक स्थानीय उत्पाद से जोड़ना और स्थानीय उद्योगों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना था। हालांकि जिले में फिलहाल यह योजना कागजों तक ही सीमित रह गई है।