पुलिस की फॉरेंसिंक टीम ने एसपी के निर्देशन में महाविद्यालय के मैदान में एक क्राइम सीन तैयार किया। विशेषज्ञों ने छात्राओं को क्राइम सीन पर जांच करने के तरीकों से अवगत कराया। फिंगर प्रिंट लेने का पूरा डेमो करके दिखाया। इसे काॅलेज की छात्राओं और शिक्षिकाओं ने सराहा।
हमने साइबर अपराध के बारे में पढ़ा है, हम जानते हैं कि कभी किसी को ओटीपी नहीं देना चाहिए। इसके अलावा बैंक आदि से आने वाले कॉल पर भी भरोसा नहीं करना चाहिए। जो भी लालच देने वाली बातें हैं, वह ठगी की साजिश हो सकती हैं।-वैशाली अग्रवाल, छात्रा।
साइबर अपराधों के प्रति जागरूक रहना ही इनसे बचाव का रास्ता है। अब तो किसी को फोन मिलाने पर भी साइबर अपराधों के प्रति जागरूक किया जाता है। हर व्यक्ति को इन शब्दों पर ध्यान देना चाहिए।-मधु कटारा, छात्रा।
पुलिस की पाठशाला में मेरे प्रश्न पर एसपी साहब ने बताया कि क्लोन वाॅयस से बचाव के लिए काॅल करने वाले को सिर्फ सुनें, फिर फोन कटने पर अपनों से फोन कर कन्फर्म करें कि पिछला कॉल उन्होंने ही किया था या वह फ्राॅड था।-सौम्या, छात्रा।
मैं सामान्य तौर पर मोबाइल का प्रयोग कम करती हूं, लेकिन इस पाठशाला में वाकई अच्छी जानकारी मिली है कि इसका प्रयोग कब और कितना करना चाहिए। मोबाइल से होने वाले अपराधों से बचाव की भी जानकारी मिली।-खुशबू, छात्रा।
मैं कभी मोबाइल का प्रयोग नहीं करती और न हीं मेरा फेसबुक आदि पर कोई अकाउंट है। पाठशाला से मैंने सीखा कि सिर्फ खुद को जागरूक रहना अवश्यक नहीं है, दूसरों को भी जागरूक करना आवश्यक है।-ऊषा चौधरी, छात्रा।
पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम बहुत ही अच्छा रहा है, इसमें मुझे काफी जानकारी मिली है। डिजिटल अरेस्ट के बारे में पता नहीं था। इस पाठशाला में डिजिटल अरेस्ट के बारे में अच्छी जानकारी दी गई है।-जूली शर्मा, छात्रा।
हमें लगा था कि कुछ ऐसा ही कार्यक्रम होगा, लेकिन अमर उजाला के इस कार्यक्रम में एसपी सर ने जो जानकारी दी, वह पहले कभी नहीं सुनी थी। अब हमें समझ में आ गया है कि किस तरह हम साइबर अपराध से बच सकते हैं।-मनी गर्ग, छात्रा।
इस पाठशाला में सबसे अच्छा विषय मुझे वाॅयस क्लोन के जरिये होने वाली ठगी का लगा। इसके बारे में मैंने कभी नहीं सुना था। इस तरह भी फ्राॅड किया जा सकता है, मुझे अब तक पता नहीं था। अब मैं सचेत रहूंगी।-कुमारी नेहा, छात्रा।