हाथरस जिले में ऑनलाइन पोर्टल पर प्राप्त होने वाली शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही सामने आई है। नगर पालिका परिषद हाथरस क्षेत्र की आने वाली शिकायतों के निस्तारण में समीक्षा के दौरान सामने आया है कि संबंधित अधिकारियों व पटल सहायकों के माध्यम से शिकायतों के निस्तारण महज एक लाइन की आख्या लगाकर इतिश्री की जा रही है। जबकि शिकायतें धरातल पर जस की तस बनी हुई हैं।
यहां तक कि बिना स्थलीय निरीक्षण के अधिकारियों द्वारा आख्या अपलोड की जा रही है। फीड बैक के दौरान शिकायतों के निस्तारण में होने वाली लापरवाही सामने आई है। इसे लेकर एडीएम न्यायिक मोइनुल इस्लाम ने नगर पालिका परिषद के अधिकारियों को चेतावनी दी है कि प्रापत होने वाली शिकायत का स्थलीय निरीक्षण कर फोटो अपलोड किया जाए। आख्या सही न होने पर शिकायत सी श्रेणी में पहुंच जाती है। इस कारण जिले की रैंकिंग भी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि इस मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व पटल सहायकों पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
केस नंबर 1- विगत में सीकनापान गली के रहने वाले अनिल कुमार ने शिकायत की, कि सरकारी नाली पर अवैध कब्जा किया गया है। इस पर नजूल निरीक्षण ने महज एक लाइन में आख्या लगा दी कि स्थल का निरीक्षण कर अंतिम नोटिस दिया जा चुका है। स्थलीय निरीक्षण का कोई फोटोग्राफ अपलोड नहीं किया गया।
केस नंबर 2 - जलेसर रोड निवासी अतुल कुमार जैन जलेसर रोड पर चारों तरफ सफाई न होने की शिकायत की थी। मुख्य सफाई निरीक्षक ने आख्या लगाई कि उक्त स्थल पर सफाई कार्य करा दिया गया है। जबकि इस संबंध में पोर्टल पर कोई फोटोग्राफ अपलोड नहीं किया गया है। फीडबैक में आख्या फर्जी भी पाई गई।
केस नंबर 3- प्रगति पुरम के रहने वाले पवन कुमार शर्मा ने सड़क के किनारे पानी भरा होने व सड़क निर्माण की शिकायत की। इस पर अवर अभियंता सिविल ने उक्त सड़क को लोनिवि के स्वामित्व बताकर इतिश्री कर ली और शिकायत को लंबित कर रखा। इस कारण संबंधित विभाग पर नहीं पहुंच सकी और शिकायत का समाधान नहीं हो सका।