जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने अधिशासी अभियंता को एक लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। आयोग ने अर्थदंड की धनराशि आदेश के एक माह के अंदर जमा करने के आदेश दिए हैं। धनराशि जमा न करने पर अधिशासी अभियंता को तीन माह का साधारण कारावास भोगना होगा।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने परिवादी संजीव कुमार बनाम अधिशासी अभियंता के मामले में आयोग द्वारा 18 मई 2022 को निर्णय दिया गया था। इस निर्णय के द्वारा परिवादी के संयोजन से संबंधित मार्च 2017 के बाद जारी विद्युत बिलों व डिमांड नोटिसों को निरस्त किया गया था। विपक्षी विद्युत विभाग को निर्देशित किया गया था कि परिवादी द्वारा विभिन्न किस्तों में जमा की गई धनराशि को माह मार्च 2017 के बिल में जमा दर्शाते हुए मार्च 2017 के बकाया को शून्य दर्शाते हुए परिवादी को मीटर यूनिट के हिसाब से पुनः विद्युत बिल बिना ब्याज व अधिभार के जारी करेगा।
इस बिल के प्राप्त होने पर परिवादी 15 दिन के अंदर अपनी आपत्ति करेगा और उस आपत्ति का निस्तारण करने के पश्चात विद्युत विभाग परिवादी को संयोजन का सही बिल जारी करेगा, जिसे परिवादी द्वारा नियमानुसार अदा किया जाएगा। फिर भी विपक्षी द्वारा निर्णय का पालन नहीं किया गया। 22 मई 2022 में संशोधित बिल दिए बिना अवैध रूप से बकाया दर्शाते हुए परिवादी के संयोजन को विच्छेदन किया गया और प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
विपक्षी विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता आशीष कुमार सूचना देने के बाद व पर्याप्त अवसर दिए जाने के बाद भी यह स्पष्ट करने के लिए आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुए कि उनके द्वारा आदेश का अनुपालन निर्णय के अनुरूप क्यों नहीं किया गया। निर्णय के अनुरूप संशोधित बिल परिवादी को प्रदत्त न किए जाने पर भी परिवादी के संयोजन से मीटर उखाड़ना उस के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराया जाना यह सिद्ध करता है कि विद्युत विभाग द्वारा पारित निर्णय से क्षुब्ध होकर यह कार्रवाई द्वेषवश की गई है।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष राकेश कुमार चतुर्थ, सदस्य कृष्ण प्रभाकर उपाध्याय, रंजना गोयल ने अधिशासी अभियंता आशीष कुमार के विरुद्ध प्रकीर्ण वाद स्वीकार करते हुए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 72 (1) के अंतर्गत दोष सिद्ध किया है। आयोग ने अधिशासी अभियंता आशीष कुमार को एक लाख के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड की धनराशि जमा न करने पर वह 3 महीने का साधारण कारावास भोगेंगे। परिवादी की ओर से पैरवी अधिवक्ता दिनेश चंद्र ने की।