कहने को तो यह जिला महिला अस्पताल है, लेकिन यहां की बदहाली देखकर लगता है कि यह खुद वेंटिलेटर पर है। बुधवार को अस्पताल की ओपीडी में करीब 200 महिला मरीजों को देखने के लिए सिर्फ एक ही चिकित्सक तैनात थीं। इलाज कराने पहुंचीं गर्भवती महिलाओं और प्रसूताओं को तपती गर्मी में घंटों कतार में लगकर दिक्कतें झेलनी पड़ीं।
हैरानी की बात यह है कि बीते 18 सालों से इस जिला महिला अस्पताल की क्षमता केवल 30 बेड की ही बनी हुई है। जिले की बढ़ती आबादी के हिसाब से यह बेड ऊंट के मुंह में जीरा के समान हैं। अस्पताल प्रशासन के सामने संकट यह है कि यदि कोई नया गंभीर मरीज या प्रसूता भर्ती होने आती है, तो बेड खाली करने के लिए पहले से भर्ती महिलाओं को पूरी तरह ठीक होने से पहले ही (समय से पहले) डिस्चार्ज कर घर भेज दिया जाता है। ऐसे में जच्चा-बच्चा दोनों की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ हो रहा है।
जिले के इस मुख्य महिला अस्पताल की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यहां एक भी स्थायी स्त्री रोग विशेषज्ञ तैनात नहीं है। अस्पताल को उधार के डॉक्टरों के भरोसे चलाया जा रहा है। व्यवस्था के नाम पर सादाबाद सीएचसी से दो दिन के लिए डॉ. प्रीति और सासनी से चार दिन के लिए डॉ. रिचा गर्ग की ड्यूटी यहां लगाई जाती है। अतिरिक्त एनएचएम से दो एमबीबीएस डॉक्टर हैं। डॉक्टरों की इस भारी कमी के कारण बुधवार को अस्पताल में केवल एक ही ओपीडी संचालित हो सकी, जिससे मरीजों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं।
मैं यहां खून की जांच कराने आई हूं। जांच लिखवाने में ही एक घंटा लग गया और अब जांच करवाने के लिए पैथोलॉजी लैब के बाहर मारामारी मची है। अस्पताल में डॉक्टरों और स्टाफ की संख्या तुरंत बढ़ाई जानी चाहिए।
-स्नेह निवासी रुहेरी
मैं अपनी पुत्रवधू को लेकर आई हूं, उसके पेट में तेज दर्द है। दो घंटे से लाइन में खड़े हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। ऊपर से इतनी भयंकर गर्मी है और अस्पताल के पंखे भी सही से हवा नहीं दे रहे हैं।
-मंजू देवी निवासी जलेसर रोड
मुख्य बिंदु
अस्पताल की क्षमता : 30 बेड
स्त्री रोग विशेषज्ञ : शून्य
अटैचमेंट : दो स्त्री रोग विशेषज्ञ
रोजाना ओपीडी- 250 से 300 मरीज
ऑपरेशन - महीने में 25 से 30
स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती के लिए शासन को लिखा गया है, इसलिए अटैचमेंट पर चिकित्सक लगे हैं। ओपीडी के अलावा इमरजेंसी में भी चिकित्सक बैठते हैं। साथ ही एनएचएम के जरिये दो चिकित्सकों की तैनाती जल्द ही होगी।
-डाॅ. डीएम सक्सेना, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल