निजी चिकित्सालयों व मेडिकल स्टोर संचालकों के सामने सरकारी तंत्र भी लाचार है। रात में शहर में बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की कमी से जूझते मरीजों को राहत दिलाने में स्वास्थ्य विभाग के अफसर भी हाथ खड़े कर रहे हैं। विभागीय अफसर कहते हैं कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि किसी को रात में निजी अस्पताल और मेडिकल स्टोर खोलने के लिए विवश किया जाए।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब 100 निजी अस्पताल और करीब 108 मेडिकल स्टोर संचालित हैं। दिन में इनमें ओपीडी व इमरजेंसी सेवाएं संचालित रहती हैं। रात में निजी चिकित्सालय बंद हो जाते हैं। इन चिकित्सालयों में भर्ती मरीजों का ही रात में उपचार किया जाता है। रात में निजी अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाएं बंद रहती हैं।
ज्यादातर मेडिकल स्टोर भी रात में बंद रहते हैं। इससे मरीजों को उपचार और दवाओं के लिए भटकना पड़ता है या फिर आगरा, अलीगढ़ या मथुरा भागना पड़ता है। कई बार तो वहां तक पहुंचते-पहुंचते मरीज की हालत भी बिगड़ जाती है। लंबे समय से शहर में रात में चिकित्सा सुविधाओं की मांग की जा रही है। अधिकारियों के सामने भी यह विषय उठाया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है।
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रात में मेडिकल स्टोर खोलने के संबंध में कोई दिशा-निर्देश नहीं हैं। संचालक स्वेच्छा से स्टोर बंद कर सकते हैं और खोल सकते हैं।
- राजकुमार शर्मा, औषधि निरीक्षक।
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निजी अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाएं रात में उपलब्ध न होने की बात संज्ञान में आई है। निजी अस्पतालों की सुरक्षा के बिंदु पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इस मामले में चिकित्सकों से वार्ता कर समस्या का समाधान निकालने के प्रयास किए जाएंगे।
- राहुल पांडेय, डीएम हाथरस।