कारोबार के पुराने दिनों की वापसी को दो बच्चियों ने रखा रोजा
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सिकंदराराऊ (हाथरस)। रमजान के मुकद्दस महीने में अपने परिवार और अपनी तरक्की और खुशहाली के लिए तो सभी रोजा रख रहे हैं, लेकिन कस्बा पुरदिलनगर की दो बच्चियों ने एक नेक मकसद के लिए रोजा रखा है। यह बच्चियां रमजान के दिनों में खुदा से कस्बे के मूंगा-मोती कारोबार के सुनहरे दिन वापस लौटाने की दुआ कर रही हैं। उन्हें उम्मीद है कि अल्लाह ताला उनकी दुआ जरूर कुबूल करेगा और मूंगा-मोती कारोबार के अच्छे दिन फिर लौटेंगे। इन बच्चियों के रोजा रखने का यह मकसद कस्बा ही नहीं, बल्कि पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है और लोग इनके नेक जज्बे को सलाम कर रहे हैं।
बता दें कि कस्बा पुरदिलनगर का मूंगा-मोती उद्योग किसी जमाने में देश ही नहीं, दुनिया के कई हिस्सों में अलग पहचान रखता था। यहां बनी कांच की कलाकृतियां देश-विदेश में खूब प्रयोग की जाती थीं। यहां के कारोबारी ही नहीं, बल्कि इस लघु उद्योग से जुड़े लोग भी बेहद खुशहाल थे, लेकिन जैसे ही चीन ने इस कारोबार में कदम जमाए, पुरदिलनगर का मूंगा-मोती उद्योग सिमटता चला गया। दो वर्ष में ही यह पूरा कारोबार चीन निगल चुका है। अब यहां की फैक्ट्रियों में सन्नाटा पसरता जा रहा है। बेरोजगारी भी दिन दूनी-रात चौगुनी गति से बढ़ रही है। हालात यह हैं कि सैकड़ों परिवारों को ढंग से दो जून की रोटी भी नसीब नहीं हो रही। हर तरफ से मायूस हो चुके लोगों को अब केवल दुआ का ही सहारा है। कस्बा निवासी राशिद इकबाल की 12 वर्षीय पुत्री अरीबा और 10 वर्षीय इत्ऱिका लगातार रोजा रखकर कस्बे के कारोबार की बहाली के लिए अल्लाह से दुआ कर रही हैं। बच्चियों को पूरा विश्वास है कि परवरदिगार उनकी दुआ अवश्य कबूल करेगा। बच्चियों के पिता राशिद इकबाल ने उनके जज्बातों को ध्यान में रखते हुए शुक्रवार को रोजा इफ्तार पार्टी का आयोजन भी किया।