एलपीजी महंगी होने के बाद शहर के व्यस्त और रिहायशी इलाकों में कोयले और लकड़ी की भटि्ठयां धड़ल्ले से सुलग रहीं हैं।
इनसे निकलने वाला धुंआ स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहा है। सांस व अस्थमा के रोगी जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। बृहस्पतिवार को भी जिला अस्पताल में सांस संबंधी समस्या के करीब 200 मरीज पहुंचे। पूरे दिन में 2200 से अधिक मरीज परामर्श के लिए जिला अस्पताल पहुंचे।
फिजिशियन डाॅ. अवधेश ने बताया कि बीते कुछ दिनों से सांस फूलने, लगातार खांसी, आंखों में जलन और एलर्जी के मरीज बढ़े हैं। कोयले के धुएं में कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य हानिकारक कण होते हैं, जो सीधे फेफड़ों पर असर करते हैं। इसलिए सीओपीडी मरीजों को मास्क पहनकर घर से बाहर निकलने की सलाह दी जाती है। अनदेखी पर फेफड़ों की गंभीर बीमारी से भी जूझना पड़ सकता है।
इलाके में छा जाता है धुएं का गुबार
घंटाघर में बृहस्पतिवार सुबह साढे़ नौ बजे एक दुकान से धुआं उठता दिखाई दिया। जानकारी करने पर पता चला कि यह होटल है तथा भट्ठी सुलगाई गई है। धुएं ने आसपास की दुकान व इमारतों को ढक दिया। यहां तक कि घंटाघर नजर नहीं आ रहा था। सीकनापान गली निवासी राकेश ने बताया कि यहां रोजाना सुबह-सुबह इसी तरह धुएं के गुबार का सामना करना पड़ता है।
हादसों को दावत दे रहीं अवैध भट्ठियां
ये भट्ठियां खतरनाक साबित हो रही हैं। व्यस्त बाजारों और संकरी गलियों में बिना किसी सुरक्षा इंतजामों के इन भट्ठियों को जलाया जा रहा है। आसपास ज्वलनशील सामग्रियां और भीड़भाड़ होने के कारण कभी भी कोई बड़ा अग्निकांड हो सकता है। भट्ठी के आसपास सुरक्षा के न तो कोई अग्निशमन उपकरण हैं और न ही धुएं को बाहर निकालने के लिए चिमनियों की सही व्यवस्था की गई है।