एक समय था जब घरों से दूर रहने वालों को होली के पर्व पर पकवानों का स्वाद चखने को नहीं मिलता था, लेकिन अब बाजारों में होली के पकवानों की खूूब बिक्री हो रही है। पिछले कुछ सालों में बढ़ते चलन के कारण इस साल शहर में करीब एक दर्जन दुकानें सजकर तैयार हो गई हैंं।
होली के अवसर पर कई प्रकार के पकवान हर घर में बनाए जाते हैं, लेकिन आज के आधुनिक दौर में अगर पकवान बनाने का समय नहीं है तो भी मेहमानों को गुजिया, मठरी, समोसे आदि पसोसे जा सकते हैं, क्योंकि अब बाजारों में होली के लिए घर जैसे पकवानों की बिक्री हो रही है। मात्र 300 रुपये किलो में मावे की गुजिया, नमकीन व अन्य प्रकार के समोसे 180 रुपये किलो में बिक रहे हैं।
इसी तरह मात्र 180 रुपये किलो में मीठे सेव और 200 से 240 रुपये प्रति किलो में नमकीन सेव, मठरी, मूंग की दाल की नमकीन, चना की दाल की नमकीन, मूंगफली की नमकीन आदि आयटम मिल रहे हैं। इतना ही नहीं शुगर फ्री पकवानों के साथ ही मनमाफिक पकवानों के ऑर्डर भी हलवाई ले रहे हैं।
अब एकल परिवारों की संख्या अधिक है। एकल परिवार में कुछ आयटम महिलाएं खुद बना लेती हैं और कुछ हमारे पास से ले लिए जाते हैं, इसलिए लगातार ये कारोबार बढ़ रहा है।
-रामकुमार, होली के पकवान के विक्रेता।
हमारे यहां दिवाली व होली सहित कई त्योहारों के लिए घर जैसे पकवान बनाए जाने की कोशिश की जाती है। इस तरह के आयटम की मांग बढ़ने का मुख्य कारण ही यही है कि मेहमान इस बात का पता न नहीं लगा पाता कि व्यंजन घर का है बाजार से मंगाया है।
-जगदीश प्रसाद, होली के पकवान के विक्रेता।