भूखा पेट तो भगवान का भजन भी नहीं होता। कर्मचारी काम क्या करेगा? पंचायती राज विभाग का भी यही हाल है। कर्मचारियों की जेब खाली है तो उनका मन भी काम पर नहीं लग रहा है। विभाग के फील्ड स्टॉफ को महीनों से मानदेय नहीं मिला है। इससे उनकी पारिवारिक जरूरतों के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है।
बच्चों की शिक्षा तक प्रभावित हो रही है। इसका असर ओडीएफ अभियान पर पड़ रहा है। हालांकि कर्मचारियों की शिकायत के बाद उप निदेशक पंचायतीराज ने मानदेय के भुगतान के लिए आदेश देते हुए मंडल के सभी डीपीआरओ से स्पष्टीकरण भी मांगा है।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत जनपद में आउटसोर्स के जरिये प्रत्येक जिले में दो जिला कंसलटेट, एक कंप्यूटर आपरेटर की नियुक्ति की गई है। प्रत्येक ब्लॉक में ब्लॉक प्रेरक भर्ती किए गए हैं। लोगों को खुले में शौच न जाने के लिए प्रेरित करने के लिए नियुक्ति इन कर्मचारियों को मानदेय के लाले पड़ रहे हैं। किसी को छह तो किसी को चार माह से मानदेय नहीं मिला है। इससे इनकी कार्यक्षमता बुरी तरह से प्रभावित है।
एक समन्वयक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जेब में जब पेट्रोल के लिए पैसे ही नहीं हैं तो फील्ड में कैसे जाएं। फील्ड में नहीं जाएंगे तो अभियान कितना सफल होगा यह आप समझ सकते हैं।