जिले में एक तरफ सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का हाल बेहाल है तो दूसरी तरफ सरकारी अस्पतालों में तैनात चिकित्सकों को प्राइवेट प्रैक्टिस से ही फुर्सत नहीं है। जिले के छह चिकित्सक तो विभाग ने प्राइवेट प्रैक्टिस करते हुए चिह्नित कर लिए हैं, लेकिन करीब छह और चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं, जिन पर अभी तक विभाग की नजर ही नहीं पड़ी है।
सरकारी अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों के प्राइवेट प्रैक्टिस करने पर रोक है। इसके बावजूद कुछ चिकित्सक निजी फायदे के लिए प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं। इस कारण वह अपना शत-प्रतिशत योगदान सरकारी अस्पतालों में नहीं दे पाते हैं। वह अस्पताल से वक्त-बे वक्त गायब रहते हैं। इससे अस्पतालों में उपचार कराने आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार तो विशेषज्ञ चिकित्सकों के अस्पताल में न मिलने पर मरीज निजी अस्पतालों में महंगा अपना उपचार कराने के लिए मजबूर हो जाते हैं। इससे सबसे ज्यादा परेशानी गरीब तबके के मरीजों को उठानी पड़ती है।
बातचीत-
खुजली की परेशानी है। अस्पताल में त्वचा रोग विशेषज्ञ मौजूद नहीं मिले। मजबूरन अन्य चिकित्सक से उपचार कराना पड़ा।
- किशन सिंह, मरीज, नगला भूरा।
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अस्पताल में चिकित्सकों की संख्या काफी कम है। इससे परेशानी का सामना करना पड़ता है। घंटों इंतजार के बाद उपचार मिल पाता है।
- हबीब खां, मरीज, रामगढ़।
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विशेषज्ञ चिकित्सक कई बार ओपीडी में मौजूद ही नहीं मिलते हैं। काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अन्य चिकित्सक से उपचार कराना पड़ता है।
- मुनीष, मरीज, बलना।
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प्राइवेट प्रैक्टिस में लिप्त छह चिकित्सकों पर कार्रवाई होगी। जिले में अन्य किसी भी चिकित्सक के चिकित्सक के प्राइवेट प्रैक्टिस में लिप्त होनेे की जानकारी नहीं है।
- डॉ. मनजीत सिंह, सीएमओ हाथरस।
केस-1
ब्लड बैंक में कार्यरत चिकित्सक कर रहे प्राइवेट प्रैक्टिस
ब्लड बैंक में कार्यरत एक चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं। वह अपने क्लीनिक पर मरीज देखते हैं। इससे वह सरकारी सेवा में अपना शत-प्रतिशत योगदान नहीं दे पाते हैं। मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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केस-2
चिकित्सक मथुरा में चला रहे क्लीनिक-
जिले के एक चिकित्सक मथुरा में अपना एक क्लीनिक चला रहे हैं। इस कारण वह अपना पूरा योगदान सरकारी सेवा में नहीं दे पाते हैं। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है।