मृतक बच्ची शिवानी और प्रियांशु
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हाथरस में हसायन क्षेत्र के गांव नगला रति से श्रीमद् भागवत कथा के समापन पर बदायूं के कछला गंगाघाट पर कलश विसर्जन करने गए नौ बच्चे गंगा में डूब गए। स्थानीय पुलिस ने गोताखोरों की मदद से गंगा में इनकी तलाश शुरू की तो एक किशोरी और एक किशोर के शव बरामद हो गए, जबकि सात किशोरों को बचा लिया गया। डूबने वालों में पांच किशोरी और चार किशोर शामिल थे।
खबर लिखने तक मरने वाली किशोरी शिवानी (10) पुत्री मोहन सिंह निवासी नगला रति के शव का अंतिम संस्कार गंगाघाट पर ही करने की तैयारी की जा रही थी, जबकि प्रियांशु (10) पुत्र वीरपाल निवासी दरियापुर गोपी थाना अकराबाद जिला अलीगढ़ हाल निवासी नगला रति थाना हसायन का शव उसके परिजन पैतृक गोपी दरियापुर ले गए। दोनों की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि गांव में भी शोक की लहर दौड़ गई है। शोक में नगला रति का बाजार भी रविवार को बंद रहा।
गांव नगला रति में आठ जून को नगला रति में भागवत कथा शुरू हुई थी। शनिवार को भंडारा और प्रसाद वितरण हुआ था। रविवार को कथा आयोजक कलश कन्याओं और ग्रामीणों के साथ कलशों को गंगा में विसर्जन करने के लिए बदायूं जिले के कछला गंगाघाट लेकर गए। कलश विसर्जन के बाद वहां सभी लोग गंगा स्नान कर रहे थे। इस दौरान गांव नगला रति निवासी मोहन सिंह बघेल की 10 साल की शिवानी व वीरपाल सिंह का 10 साल का पुत्र प्रियांशु सहित नौ किशोर और किशोरी गंगा में डूब गए।
ग्रामीणों ने इस घटना की जानकारी तत्काल पुलिस को दी। पुलिस ने गोताखोरों की मदद से इनकी गंगा में तलाश कराई तो शिवानी और प्रियांशु के शव बरामद हो गए, जबकि बाकी सात बच्चों को सकुशल निकाल लिया गया। इनको उपचार के लिए कासगंज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां चिकित्सक ने शिवानी व प्रियांशु को मृत घोषित कर दिया।
कछला चौकी इंचार्ज प्रमोद कुमार ने बताया कि दस से अधिक गोताखोरों ने प्रियांशु और शिवानी की खोजबीन की। तेज बहाव की वजह से शिवानी का शव करीब आधा किलोमीटर दूर तक बहता चला गया था। परिजनों ने पुलिस कार्रवाई से भी इन्कार किया है। इसलिए शवों का पोस्टमार्टम भी नहीं कराया गया।
न गहराई का अंदाजा लगा न किसी ने बच्चों को आगे जाने पर टोका
गांव रति का नगला के बच्चे और महिलाएं भीड़भाड़ से दूर घाट से पश्चिमी छोर की ओर स्नान करने के लिए बढ़ते चले गए। उनके साथ मौजूद किसी पुरुष ने उनसे पहले आगे आकर गहराई का अंदाजा लगाना उचित नहीं समझा। न ही किसी ने बच्चों को गंगा में आगे बढ़ने से रोका। यदि कोई टोक देता तो शायद बच्चे गहराई की ओर नहीं जाते।