जिला अस्पताल में परामर्श के लिए लगी मरीजों की भीड़। संवाद
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा कर्मियों के हड़ताल पर चले जाने से ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं बीमार हो गई हैं। इसका सबसे ज्यादा असर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर देखने को मिल रहा है, जहां व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। तीन दिन सीएमओ कार्यालय पर प्रदर्शन करने के बाद सोमवार को कर्मचारी लखनऊ पहुंचे।
एनएचएम कर्मियों के कार्य बहिष्कार के कारण सीएचसी और पीएचसी पर ओपीडी, जांच और अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रभावित हुए हैं। संविदा कर्मियों के न होने से अब मरीजों को संभालने और व्यवस्थाएं चलाने की पूरी जिम्मेदारी वहां तैनात स्थायी चिकित्सकों और फार्मासिस्टों के कंधों पर आ गई है, जिससे उन्हें अतिरिक्त कार्यभार उठाना पड़ रहा है।
इमरजेंसी और महिला अस्पताल में राहत
जिला महिला अस्पताल में प्रसव कक्ष व एसएनसीयू संविदा कर्मियों के भरोसे ही चल रहे हैं। इसके साथ ही इमरजेंसी सेवाएं भी ईएमओ संभाल रहे हैं। एसएनसीयू में वर्तमान में 17 बच्चे भर्ती हैं, जबकि बेड केवल 12 हैं। ऐसे ही प्रसव कक्ष में रोजाना 10 से 12 प्रसव होते हैं। आपात स्थिति को समझते हुए यहां तैनात ईएमओ, एएनएम व अन्य कर्मचारी हड़ताल में शामिल नहीं हुए। सोमवार को लखनऊ न जाकर सभी ड्यूटी पर मौजूद रहे। सीएमएस डाॅ. सूर्यप्रकाश ने बताया कि जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं प्रभावित नहीं हुई हैं।